नई दिल्ली। अखिल भारतीय पंचायत परिषद (AIPPC) का 18वां राष्ट्रीय सम्मेलन कर्नाटक के गडग में 12 और 13 दिसंबर 2025 को सफलतापूर्वक आयोजित हुआ। दो दिवसीय इस सम्मेलन की अध्यक्षता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय ने की। सम्मेलन में देशभर से आए पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधि, पदाधिकारी और विशेषज्ञ शामिल हुए।
सम्मेलन के दौरान विभिन्न राज्यों से प्राप्त सुझावों और प्रस्तावों पर गहन चर्चा के बाद पंचायतों के सर्वांगीण सशक्तिकरण से जुड़ी 14 अहम मांगों को सर्वसम्मति से पारित किया गया। परिषद ने स्पष्ट किया कि इन मांगों को लेकर एक प्रतिनिधिमंडल शीघ्र ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भेंट कर उन्हें औपचारिक रूप से सौंपेगा।
पंचायतों को मजबूत बनाने पर जोर
अपने अध्यक्षीय संबोधन में सुबोध कांत सहाय ने कहा कि देश की असली ताकत गांवों में बसती है और पंचायतों को सशक्त किए बिना आत्मनिर्भर भारत का सपना साकार नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि यह दौर वैश्वीकरण का नहीं, बल्कि स्थानीयकरण और विकेंद्रीकरण का है। सम्मेलन का आयोजन कर्नाटक पंचायत परिषद और राज्य के पंचायती राज मंत्री प्रियांक खरगे के विशेष आग्रह पर किया गया।
प्रमुख प्रस्ताव क्या रहे
सम्मेलन में पारित प्रस्तावों में पंचायतों का आर्थिक सशक्तिकरण, डिजिटल पंचायत प्रणाली को बढ़ावा, सांसद और विधायक निधि की तर्ज पर सरपंच निधि की व्यवस्था, निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों के लिए वेतन और पेंशन, तथा प्रत्येक ग्राम पंचायत में समर्पित प्रशासनिक स्टाफ की नियुक्ति जैसी मांगें प्रमुख रहीं।
स्मार्ट गांव से बनेगा स्मार्ट भारत
परिषद के कार्यवाहक अध्यक्ष डॉ. अशोक चौहान ने कहा कि केवल स्मार्ट शहरों से देश स्मार्ट नहीं बन सकता, इसके लिए स्मार्ट गांवों का निर्माण जरूरी है। राष्ट्रीय सलाहकार बद्री नाथ ने तकनीकी रूप से आधुनिक लेकिन सांस्कृतिक रूप से भारतीय गांवों के विकास पर बल दिया। महामंत्री अनिल शर्मा ने परिषद की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की। वहीं दिल्ली प्रदेश पंचायत परिषद के अध्यक्ष ध्यान पाल सिंह जादौन ने पंचायत प्रतिनिधियों को वेतन, पेंशन और भत्ते दिए जाने की मांग को प्रमुखता से उठाया, जिसे व्यापक समर्थन मिला।
देशभर से प्रतिनिधियों की भागीदारी
सम्मेलन में उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा, गोवा, मणिपुर और जम्मू-कश्मीर सहित कई राज्यों से पंचायत प्रतिनिधि और गणमान्य लोग मौजूद रहे।
कर्नाटक सरकार के मंत्री रहे उपस्थित
कार्यक्रम में कर्नाटक सरकार के कानून एवं संसदीय कार्य मंत्री एच. के. पाटिल, विधान परिषद सदस्य एस. वी. संकनूर, पूर्व सांसद नारायण स्वामी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और शिक्षाविद् भी शामिल हुए। सम्मेलन के सफल आयोजन में परिषद के कार्यवाहक अध्यक्ष बी. वाई. घोरपड़े और उनकी टीम की अहम भूमिका रही।
यह सम्मेलन पंचायतों को अधिक अधिकार, संसाधन और सम्मान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।