Mandi, Dharamveer-:मंडी में आयोजित नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) कर्मचारी महासंघ के चौथे जिला अधिवेशन में वर्षों से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ कड़ा रोष जताया। कर्मचारियों का कहना है कि दो दशक से अधिक समय से वे स्वास्थ्य संस्थानों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, बावजूद इसके उन्हें आज तक नियमित नहीं किया गया। हाईकोर्ट का फैसला कर्मचारियों के पक्ष में आने के बाद अब सरकार को बिना किसी टकराव की स्थिति बनाए एनएचएम कर्मियों को नियमित करना चाहिए।
अधिवेशन के दौरान एनएचएम कर्मचारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया तो उन्हें मजबूरन आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा। महासंघ के प्रदेश विधिक सलाहकार राकेश कुमार ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में अब तक आई सभी सरकारों ने एनएचएम कर्मचारियों का शोषण किया है। यह कर्मचारी दिन-रात प्रदेश की जनता को स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन बदले में उन्हें न तो स्थायी नीति मिली और न ही नियमित वेतनमान।राकेश कुमार ने कहा कि एनएचएम के अंतर्गत कार्यरत 52 श्रेणियों के कर्मचारियों के लिए एक स्थायी नीति बनाई जानी चाहिए। उन्हें नियमित पे-स्केल दिया जाए, ईपीएफ की कटौती सुनिश्चित की जाए और लंबे समय से चली आ रही वेतन विसंगतियों को दूर किया जाए। उन्होंने सरकार द्वारा ऐप के माध्यम से हाजिरी लगाने की योजना का भी विरोध किया और कहा कि बिना किसी अतिरिक्त वित्तीय प्रावधान के कर्मचारियों पर इस तरह के फैसले थोपना अनुचित है।
इस अवसर पर महासंघ के जिला स्तरीय चुनाव भी सर्वसम्मति से संपन्न हुए। नई जिला कार्यकारिणी का गठन किया गया, जिसमें नवनीत गुलेरिया को जिला अध्यक्ष चुना गया। डॉ. विपुल को वरिष्ठ उपाध्यक्ष, विनोद कुमार और पूजा चौधरी को उपाध्यक्ष बनाया गया। कामना, रविकांत और अतुल संयुक्त सचिव, चेतन संख्यान को कोषाध्यक्ष तथा राकेश शर्मा को लीगल एडवाइजर व प्रेस सेक्रेटरी नियुक्त किया गया।नव नियुक्त जिला अध्यक्ष नवनीत गुलेरिया ने कहा कि यदि सरकार शीघ्र एनएचएम कर्मचारियों के लिए स्थायी पॉलिसी लागू नहीं करती है तो कर्मचारी व्यापक आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की होगी।