चंडीगढ़। हरियाणा विधानसभा का तीन दिवसीय शीतकालीन सत्र राजनीतिक तौर पर बेहद अहम और हंगामेदार रहा। पूर्ण बहुमत वाली भाजपा सरकार के खिलाफ कांग्रेस द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव न केवल विफल रहा, बल्कि विपक्ष की रणनीति पर भी सवाल खड़े कर गया। कांग्रेस इस प्रस्ताव में उलझकर रह गई, जबकि उसे इनेलो का अपेक्षित समर्थन भी नहीं मिल सका। दूसरी ओर, भाजपा ने सदन की कार्यवाही और राजनीतिक रणनीति—दोनों मोर्चों पर बढ़त बनाए रखी।
इस सत्र में कुछ नई संसदीय परंपराएं भी देखने को मिलीं। पहली बार स्पीकर हरविन्द्र कल्याण और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विपक्ष के नेता पद को उसकी गरिमा के अनुरूप सम्मान दिया। करीब सवा साल बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा विपक्ष के नेता के रूप में सदन में उपस्थित रहे, जिसकी औपचारिक घोषणा स्पीकर ने सदन में की।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हुड्डा के राजनीतिक जीवन और संसदीय अनुभव की सराहना करते हुए उन्हें लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक बताया। यह बयान सदन में चर्चा का विषय बना और इसे भाजपा की सोची-समझी राजनीतिक रणनीति के रूप में देखा गया। पूरे सत्र के दौरान स्पीकर ने कार्यवाही का संयमित और व्यवस्थित संचालन किया।
सत्र के दौरान कांग्रेस को अलग-अलग मुद्दों पर तीन से चार बार वॉकआउट करना पड़ा। अविश्वास प्रस्ताव पर करीब साढ़े पांच घंटे चली लंबी बहस के बाद कांग्रेस बिना मतदान कराए ही सदन से बाहर निकल गई, जिससे भाजपा की रणनीति सफल साबित हुई। कांग्रेस ने अपने प्रस्ताव में ‘तंत्र का लोक’ और ‘टनल सोच’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया, जिन्हें लेकर मुख्यमंत्री ने विपक्ष को तीखे अंदाज में घेरा।
इस सत्र में कांग्रेस और इनेलो के बीच तालमेल की कमी भी साफ नजर आई। कांग्रेस के 37 विधायकों को किसी भी मुद्दे पर इनेलो के दो विधायकों का समर्थन नहीं मिला, जबकि इनेलो विधायक कई बार कांग्रेस पर ही अधिक हमलावर दिखे। वहीं, कांग्रेस विधायकों की हरी जैकेट और इनेलो की हरी पगड़ी भी सदन में चर्चा का विषय बनी।
शीतकालीन सत्र में कुल 23 घंटे चर्चा हुई और 16 विधेयक पारित किए गए। वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर लाए गए प्रस्ताव के दौरान हुए हंगामे के चलते स्पीकर को नौ कांग्रेस विधायकों को नेम करना पड़ा। इस दौरान महिला मार्शलों और एक कांग्रेस विधायक के बीच धक्का-मुक्की की घटना भी सामने आई।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की मुस्कान भी सत्र के दौरान चर्चा में रही। उन्होंने कहा कि हंसना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, लेकिन विपक्ष को उनकी मुस्कुराहट से भी परेशानी है। भाजपा नेताओं ने इसे आत्मविश्वास का प्रतीक बताया।
कुल मिलाकर, यह शीतकालीन सत्र कांग्रेस के लिए रणनीतिक रूप से कमजोर साबित हुआ, जबकि भाजपा ने न केवल सदन की कार्यवाही पर नियंत्रण रखा, बल्कि राजनीतिक संदेश देने में भी सफलता हासिल की।