Shimla, 24 December-:हिमाचल प्रदेश की राजधानी में लंबे समय से चली आ रही ट्रैफिक जाम की समस्या के समाधान की दिशा में एक और अहम उपलब्धि दर्ज की गई है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की शिमला बाईपास परियोजना के तहत टनल नंबर-5 का निर्माण कार्य निर्णायक चरण में पहुंच गया है। मंगलवार को इस सुरंग के दोनों सिरे आपस में मिल गए, जिसे परियोजना का महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।
एनएचएआई अधिकारियों के अनुसार, करीब 210 मीटर लंबी इस टनल का निर्माण कार्य 22 मई 2025 को शुरू किया गया था। गावर और भारत कंस्ट्रक्शन कंपनी ने महज 7 महीनों में इस चुनौतीपूर्ण कार्य को पूरा कर एक नया रिकॉर्ड कायम किया है। पहाड़ी क्षेत्र की भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद टनल का निर्माण न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मैथड (NATM) तकनीक से किया गया, जिसे पहाड़ों में सुरंग निर्माण के लिए सबसे सुरक्षित और प्रभावी माना जाता है।
यह टनल शिमला बाईपास को इसके अंतिम छोर चलौंठी से जोड़ती है। इसके चालू होने के बाद अटल सुपर स्पैशलिटी आयुर्विज्ञान संस्थान, चमियाना तक मरीजों और उनके परिजनों की पहुंच काफी आसान हो जाएगी। अभी तक संकरे रास्तों और भारी ट्रैफिक के कारण अस्पताल पहुंचने में लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था।
27.457 किलोमीटर लंबी शिमला बाईपास परियोजना चंडीगढ़-शिमला कॉरिडोर का अहम हिस्सा है, जिसमें कुल पांच टनल बनाई जा रही हैं। परियोजना के पूर्ण होने पर शिमला शहर के भीतर ट्रैफिक का दबाव कम होगा और ढली तक पहुंचने का समय लगभग एक घंटा घट जाएगा। इससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि ऊपरी शिमला के लोगों के लिए यह मार्ग एक लाइफलाइन साबित होगा। खासकर सेब सीजन के दौरान बागवानों को अपनी उपज मंडियों तक पहुंचाने में बड़ी राहत मिलेगी।