नई दिल्ली। बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई में लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि शहर में विकास और निर्माण कार्यों को रोका नहीं जा सकता, लेकिन वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए तय नियमों का सख्ती से पालन कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
मंगलवार, 23 दिसंबर को मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अंखड़ की पीठ ने कहा कि वायु प्रदूषण को काबू में करने में संबंधित अधिकारी अब तक विफल रहे हैं। कोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा कि यदि समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो हालात नियंत्रण से बाहर हो सकते हैं।
अदालत ने BMC और MPCB को निर्देश दिए कि वे शहर में बढ़ते वायु प्रदूषण को कम करने के लिए तत्काल और प्रभावी कदम उठाएं। साथ ही निर्माण स्थलों, सड़कों और अन्य प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों पर लागू नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें।
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य विकास कार्यों को रोकना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि नियमों की अनदेखी न हो। पीठ ने कहा, “अगर आज भी सख्त प्रयास नहीं किए गए, तो भविष्य में स्थिति को संभालना बेहद मुश्किल हो जाएगा। एक बार हालात बिगड़ गए तो फिर कुछ भी आपके नियंत्रण में नहीं रहेगा।”
अदालत ने BMC आयुक्त भूषण गगरानी और MPCB सचिव देवेंद्र सिंह को वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए ठोस सुझाव पेश करने को भी कहा है। कोर्ट ने कहा कि अधिकारी न केवल प्रशासनिक जिम्मेदारियों में हैं, बल्कि इस देश के नागरिक भी हैं, और प्रदूषण रोकना उनका मौलिक कर्तव्य है।
इसके साथ ही हाई कोर्ट ने मुंबई के एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) पर भी गंभीर चिंता जताई और संकेत दिए कि यदि हालात में सुधार नहीं हुआ तो आगे और सख्त निर्देश जारी किए जा सकते हैं।