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लुधियाना-तलवंडी एनएच परियोजना पर कैग की रिपोर्ट, NHAI पर सवाल

जालंधर। लुधियाना-तलवंडी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना (एनएच-95, वर्तमान एनएच-5) में वर्षों की देरी और लागत में भारी बढ़ोतरी को लेकर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने गंभीर आपत्ति जताई है। कैग की रिपोर्ट में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के निर्णयों को परियोजना की विफलता का प्रमुख कारण बताया गया है।

2011 में हुआ था समझौता, अब तक अधूरी परियोजना

कैग के अनुसार, एनएचएआई ने जनवरी 2011 में इस फोर-लेन हाईवे परियोजना के लिए निजी रियायतधारी के साथ बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (टोल) मॉडल पर समझौता किया था। परियोजना को सितंबर 2014 तक पूरा किया जाना था, लेकिन यह लक्ष्य वर्षों बाद भी हासिल नहीं हो सका।

रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2013 के बाद रियायतधारी ने वित्तीय संकट का हवाला देते हुए निर्माण कार्य की गति धीमी कर दी और बाद में साइट से मशीनरी तक हटा ली। नवंबर 2019 तक परियोजना का 91.9 प्रतिशत काम पूरा हो चुका था, जबकि इस दौरान 453.8 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके थे, फिर भी शेष कार्य अधूरा रह गया।

OTFIS योजना पर भी उठे सवाल

शेष निर्माण को पूरा करने के लिए एनएचएआई ने वन-टाइम फाइनेंशियल असिस्टेंस स्कीम (OTFIS) के तहत सहायता देने का फैसला किया, लेकिन कैग ने इस कदम को भी अपर्याप्त बताया। रिपोर्ट के मुताबिक वित्तीय सहायता केवल 75 प्रतिशत कार्य के प्रोविजनल कंप्लीशन तक सीमित रखी गई, जिससे परियोजना में और देरी हुई।

कैग का कहना है कि यदि समय रहते पूरा वित्तीय सहयोग दिया गया होता, तो परियोजना तय समय में पूरी हो सकती थी और अतिरिक्त खर्च से बचा जा सकता था। गलत योजना, असंगत फैसलों और देरी के कारण परियोजना पर करीब 41.7 करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ा। बाद में बचे कार्यों को दोबारा आवंटित करने से लागत और बढ़ गई।

कैग की कड़ी टिप्पणी

कैग ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि एनएचएआई की कमजोर निर्णय प्रक्रिया और असंतुलित वित्तीय प्रबंधन के चलते न केवल यह महत्वपूर्ण सड़क परियोजना प्रभावित हुई, बल्कि सरकारी संसाधनों का भी समुचित उपयोग नहीं हो पाया। लुधियाना-तलवंडी एनएच परियोजना का यह मामला एक बार फिर बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में समयबद्ध निर्णय, प्रभावी निगरानी और जवाबदेही की आवश्यकता को उजागर करता है।

कैग की यह रिपोर्ट आने वाले दिनों में एनएचएआई और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के लिए कई अहम और असहज सवाल खड़े कर सकती है।

Karuna

infosummerexpress@gmail.com

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