चंडीगढ़। हरियाणा में असिस्टेंट इंजीनियर (सहायक अभियंता) भर्ती प्रक्रिया को लेकर आम आदमी पार्टी ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने कहा कि इस भर्ती में हरियाणा के योग्य युवाओं को नजरअंदाज किया गया है, जबकि बाहरी राज्यों के अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दी गई।
ढांडा ने जारी आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि सामान्य वर्ग के कुल 214 पदों में से केवल 29 उम्मीदवार ही हरियाणा के चयनित हुए हैं। वहीं, दूसरी श्रेणी के सामान्य वर्ग के 153 पदों में से 106 पद ऐसे अभ्यर्थियों को मिले हैं, जो हरियाणा के निवासी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि राज्य सरकार की नीतियां स्थानीय युवाओं के हितों के खिलाफ हैं।
AAP नेता ने आरोप लगाया कि सरकार ने जानबूझकर रिहायश प्रमाणपत्र (डोमिसाइल) की शर्तों में बदलाव किया। पहले जहां 15 साल की रिहायश अनिवार्य थी, उसे घटाकर केवल पांच साल कर दिया गया। ढांडा का कहना है कि इस फैसले से बाहरी लोगों को हरियाणा की सरकारी नौकरियों में प्रवेश का रास्ता आसान हो गया, जबकि यहां के युवाओं को नुकसान उठाना पड़ा।
उन्होंने कहा कि हरियाणा के युवा पहले से ही बेरोजगारी की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। ऐसे में अगर सरकारी भर्तियों में भी उनके साथ न्याय नहीं होगा, तो यह सामाजिक और आर्थिक असंतोष को बढ़ावा देगा। ढांडा ने सवाल उठाया कि राज्य सरकार आखिर किसके हित में ऐसे फैसले ले रही है।
अनुराग ढांडा ने मांग की कि असिस्टेंट इंजीनियर भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराई जाए और रिहायश से जुड़ी शर्तों को फिर से सख्त बनाया जाए, ताकि हरियाणा के युवाओं को उनका हक मिल सके। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस मुद्दे पर जल्द ठोस कदम नहीं उठाए, तो आम आदमी पार्टी इसे लेकर सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन करेगी।
AAP नेता ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी हमेशा से स्थानीय युवाओं के रोजगार और अधिकारों की लड़ाई लड़ती रही है और आगे भी हरियाणा के युवाओं के साथ किसी भी तरह का अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।