Dharamshala, Rahul-: पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा है कि केंद्र सरकार हिमाचल प्रदेश को प्राकृतिक आपदाओं से उबारने के लिए लगातार आर्थिक सहायता उपलब्ध करवा रही है। नूरपुर दौरे के दौरान धर्मशाला में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने बताया कि भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने पोस्ट डिजास्टर नीड्स असेसमेंट (PDNA) के तहत हिमाचल प्रदेश को 601 करोड़ 92 लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता जारी की है। यह राशि राज्य में आपदा से हुए नुकसान की भरपाई और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए बेहद अहम है।
जयराम ठाकुर ने इस सहायता के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इससे पहले भी PDNA के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा 451 करोड़ रुपये की सहायता हिमाचल को दी जा चुकी है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 से अब तक आई विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं के लिए केंद्र सरकार आपदा राहत मद में ही लगभग 6000 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राज्य को दे चुकी है, जबकि प्रधानमंत्री द्वारा घोषित अन्य पैकेज और विशेष घोषणाएं इससे अलग हैं।नेता प्रतिपक्ष ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इतनी बड़ी केंद्रीय सहायता के बावजूद आपदा प्रभावितों तक राहत राशि सही ढंग से नहीं पहुंच पाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि 2023 से अब तक आई सभी आपदाओं को मिलाकर भी राज्य सरकार प्रभावित परिवारों को कुल 500 करोड़ रुपये की सहायता तक वितरित नहीं कर पाई है, जो सरकार की प्राथमिकताओं और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने मांग की कि केंद्र से प्राप्त प्रत्येक रुपये का पारदर्शी और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए, क्योंकि यह धन किसी सरकार का नहीं बल्कि आपदा पीड़ित हिमाचलवासियों का है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा बार-बार केंद्र पर सहयोग न देने के आरोप लगाए जाते हैं, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। मुख्यमंत्री और उनके मंत्रिमंडल को इस आर्थिक सहायता के लिए प्रधानमंत्री और गृह मंत्री का सार्वजनिक रूप से धन्यवाद करना चाहिए।इस अवसर पर उन्होंने आईजीएमसी शिमला में हुए डॉक्टर–मरीज विवाद पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह घटना दोनों पक्षों के लिए दुखद है और न तो डॉक्टर को मरीज पर हाथ उठाना चाहिए था, न ही मरीज को डॉक्टर पर हमला करना चाहिए था। उन्होंने डॉक्टर की सेवाएं समाप्त करने के फैसले को अव्यावहारिक बताते हुए सरकार से इस मामले पर पुनर्विचार करने और ऐसा समाधान निकालने की अपील की, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों।