Chamba, Manjur Pathan-:हिमाचल प्रदेश में जहां एक ओर आपदा प्रबंधन अधिनियम लागू है, वहीं दूसरी ओर हालात ऐसे बनते दिख रहे हैं मानो सरकार खुद ही आने वाली आपदा को न्योता दे रही हो। चंबा जिला के मसरूड रेंज अंतर्गत छतरी ब्लॉक में निजी भूमि की आड़ में बड़े पैमाने पर कश्मल निकालने की अनुमति ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि इस बहाने सरकारी वन भूमि से धड़ल्ले से अवैध कश्मल उखाड़ी जा रही है, जिससे क्षेत्र में भविष्य की बड़ी प्राकृतिक आपदा का खतरा बढ़ गया है।
प्रदेश बीते तीन वर्षों से लगातार प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहा है। हालात ऐसे हैं कि पंचायती राज चुनाव तक नहीं हो पाए और विकास कार्य लगभग ठप पड़े हैं। इसके बावजूद, स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन की लापरवाही के चलते वन क्षेत्रों के साथ खुला खिलवाड़ किया जा रहा है। छतरी ब्लॉक में स्थिति यह है कि रात के अंधेरे में बड़ी-बड़ी गाड़ियों में कश्मल भरकर ले जाया जा रहा है, लेकिन वन विभाग की मौजूदगी कहीं नजर नहीं आती।स्थानीय लोगों का कहना है कि वन विभाग मानो पूरी तरह गायब हो गया है। कोई रोक-टोक नहीं है और न ही निगरानी। मजबूरी में ग्रामीणों ने खुद मोर्चा संभाल लिया है। ठंड के इस मौसम में पिछले पंद्रह दिनों से ग्रामीणों ने टीमें बनाकर रात-दिन जंगलों की पहरेदारी शुरू कर दी है, ताकि अवैध कटान को रोका जा सके।
ग्रामीणों का आरोप है कि आपदा के नाम पर अवसर तलाशे जा रहे हैं और सरकारी जमीन को नुकसान पहुंचाकर भविष्य की आपदा की नींव रखी जा रही है। निजी भूमि की आड़ में जिस तरह से वन क्षेत्र को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, उससे भूस्खलन और बाढ़ जैसी घटनाओं का खतरा और बढ़ सकता है।
“वन विभाग घरों में दुबका बैठा है। मजबूरी में हम लोग सर्द रातों में अपने जंगलों की रखवाली कर रहे हैं। सरकार से मांग है कि कश्मल निकालने की यह अनुमति तुरंत बंद की जाए, ताकि हमें आने वाले समय में किसी बड़ी आपदा का सामना न करना पड़े।”स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री से मामले में हस्तक्षेप कर सख्त कार्रवाई की मांग की है।