यमुनानगर। जिले के सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या लगातार घट रही है। बीते एक वर्ष के भीतर 10 हजार 683 विद्यार्थियों की कमी दर्ज की गई है। इनमें से कितने छात्र पढ़ाई छोड़ चुके हैं और कितनों ने निजी स्कूलों का रुख किया है, इसका खुलासा शिक्षा विभाग द्वारा कराए जा रहे विशेष सर्वे से होगा।
ड्रॉपआउट दर को कम करने के उद्देश्य से शिक्षा विभाग ने चार चरणों में सर्वे शुरू किया है, जो 19 जनवरी तक चलेगा। इस अभियान के तहत पढ़ाई से बाहर हो चुके विद्यार्थियों की पहचान कर उन्हें दोबारा स्कूलों में दाखिल कर शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
चार चरणों में होगा सर्वे अभियान
पहले चरण में स्कूल स्तर पर सर्वे किया जा रहा है, जिसमें शिक्षक, शिक्षा स्वयंसेवक, स्काउट-गाइड, एनएसएस सदस्य, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और पंचायत प्रतिनिधि शामिल हैं। यह टीमें अनुसूचित जाति-जनजाति बहुल क्षेत्रों, प्रवासी परिवारों, सड़क पर रहने वाले बच्चों, अनाथ, बेघर, घुमंतु समुदायों और ईंट-भट्टों तक पहुंचकर 7 से 14 और 16 से 19 आयु वर्ग के ड्रॉपआउट विद्यार्थियों को चिन्हित कर रही हैं। इस चरण की रिपोर्ट 9 जनवरी तक क्लस्टर हेड को सौंपी जाएगी।
दूसरे चरण में 12 और 13 जनवरी को क्लस्टर स्तर पर रिपोर्ट संकलित कर बीईओ और बीआरसी को भेजी जाएगी। तीसरे चरण में 14 और 15 जनवरी को खंड स्तर पर डेटा एकत्र कर डीपीसी को सौंपा जाएगा। चौथे और अंतिम चरण में 16 से 19 जनवरी के बीच जिला स्तर पर सभी आंकड़े मुख्यालय को भेजे जाएंगे।
दो वर्षों में 20,635 छात्रों की गिरावट
आंकड़ों के अनुसार, जिले के सरकारी स्कूलों में बीते दो वर्षों में कुल 20,635 विद्यार्थियों की कमी आई है। वर्ष 2022 में जहां छात्र संख्या 1,07,386 थी, वहीं 2023 में यह 1,07,212 रह गई। 2024 में यह घटकर 97,200 और 2025 में मात्र 86,517 पर पहुंच गई। सर्वे के बाद यह स्पष्ट होगा कि इनमें से कितने छात्र ड्रॉपआउट हुए और कितनों ने निजी स्कूलों में दाखिला लिया।
शिक्षकों की कमी बनी बड़ी चुनौती
सर्वे कार्य के दौरान शिक्षकों की भारी कमी सामने आ रही है। जिले के करीब एक दर्जन स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं है, जबकि दो दर्जन स्कूलों में केवल एक शिक्षक तैनात है। ऐसे स्कूलों में क्लस्टर स्तर से अस्थायी व्यवस्था की जा रही है। इसके बावजूद, शीतकालीन अवकाश के दौरान शिक्षकों पर सर्वे का अतिरिक्त दबाव होने से अभियान की सफलता पर सवाल उठ रहे हैं।
ड्रॉपआउट बढ़ने के पीछे ये कारण
विशेषज्ञों के अनुसार सरकारी स्कूलों में ड्रॉपआउट बढ़ने के पीछे सामाजिक, आर्थिक और पारिवारिक कारण प्रमुख हैं। इसके अलावा शिक्षकों की कमी, बुनियादी ढांचे का अभाव, लगभग 600 रिक्त पद, डुअल डेस्क और स्कूल भवनों की खराब स्थिति भी बड़ी वजह मानी जा रही है।
छोटे बच्चों का कराया जाएगा दाखिला
जिला शिक्षा अधिकारी प्रेमलता ने बताया कि सर्वे के दौरान चिन्हित ड्रॉपआउट विद्यार्थियों को दोबारा स्कूलों में लाने पर जोर दिया जाएगा। छह से सात वर्ष आयु के बच्चों का नजदीकी राजकीय प्राथमिक स्कूल में दाखिला कराया जाएगा, जबकि बड़े बच्चों के लिए पढ़ाई छोड़ने के कारणों की समीक्षा कर समाधान निकाला जाएगा। उन्होंने कहा कि सर्वे को गुणवत्ता के साथ समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश सभी संबंधित अधिकारियों को दिए गए हैं।