चंडीगढ़ | सुप्रीम कोर्ट तक विवाद पहुंचने के बावजूद एसवाईएल (सतलुज-यमुना लिंक) नहर से पंजाब से पानी नहीं मिल पाया है, लेकिन अब यह नहर दक्षिणी हरियाणा और दिल्ली के लिए जल संकट दूर करने में अहम भूमिका निभाने जा रही है। सिंचाई विभाग की योजना के तहत जरूरत पड़ने पर एसवाईएल में नरवाना ब्रांच नहर और मारकंडा नदी का पानी छोड़ा जाएगा, जिससे जलापूर्ति के साथ-साथ बाढ़ नियंत्रण में भी मदद मिलेगी।
सिंचाई विभाग ने दक्षिणी हरियाणा तक कुल 10 हजार क्यूसेक पानी पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। इसमें एसवाईएल नहर के माध्यम से 6500 क्यूसेक और नरवाना ब्रांच नहर से 3500 क्यूसेक पानी भेजा जाएगा। इस योजना को लागू करने के लिए नहरों का बड़े पैमाने पर पहली बार जीर्णोद्धार किया जा रहा है।
लंबे समय से मरम्मत न होने के कारण एसवाईएल नहर अपने मूल स्वरूप को खो चुकी है। जिले की सीमा में करीब 35 किलोमीटर लंबी नहर के जीर्णोद्धार पर लगभग 50 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस प्रस्ताव को सिंचाई विभाग की प्रदेश तकनीकी टीम मंजूरी दे चुकी है और अब मुख्यमंत्री की अंतिम स्वीकृति का इंतजार है।
नहर की चौड़ाई कई स्थानों पर 25 फीट से घटकर 15 फीट रह गई है। गाद जमने, झाड़ियों और पेड़ों के उगने तथा किनारों के जर्जर होने से नहर की जल वहन क्षमता काफी कम हो गई है, जिससे आपात स्थिति में खतरा पैदा हो सकता है।
सिंचाई विभाग के एक्सईएन मुनीष बब्बर के अनुसार मुख्यमंत्री की मंजूरी मिलते ही टेंडर प्रक्रिया पूरी कर काम तुरंत शुरू कर दिया जाएगा। जीर्णोद्धार के बाद एसवाईएल के जरिये 6500 क्यूसेक और नरवाना ब्रांच नहर से 3500 क्यूसेक पानी दक्षिणी हरियाणा तक पहुंचाया जाएगा। इससे न केवल जल संकट से राहत मिलेगी, बल्कि मारकंडा नदी से आने वाली बाढ़ के खतरे पर भी प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।