Mandi, Dharamveer-:श्री लाल बहादुर शास्त्री मेडिकल कॉलेज नेरचौक में प्रशिक्षु डॉक्टरों के बीच हुआ विवाद अब जांच के बाद नए खुलासों के साथ सामने आया है। कॉलेज की एंटी-रैगिंग कमेटी की विस्तृत जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि 18 दिसंबर 2025 को हुई घटना में मारपीट तो हुई, लेकिन रैगिंग के आरोप सही नहीं पाए गए। जांच के आधार पर कॉलेज प्रबंधन ने तीनों प्रशिक्षु डॉक्टरों को दोषी मानते हुए उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की है।
यह मामला 18 दिसंबर की शाम करीब 6 बजे का है, जब सेकेंड ईयर के प्रशिक्षु डॉक्टर शुभम और थर्ड ईयर के दो सीनियर प्रशिक्षु डॉक्टरों के बीच विवाद बढ़ गया। अगले दिन शुभम ने छात्रावास प्रबंधन और थाना बल्ह में शिकायत दर्ज करवाई थी, जिसमें उसने सीनियर प्रशिक्षु डॉक्टरों पर मारपीट और रैगिंग के गंभीर आरोप लगाए थे। शिकायत के बाद कॉलेज प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एंटी-रैगिंग कमेटी का गठन किया।कमेटी की जांच रिपोर्ट में सामने आया कि दोनों सीनियर प्रशिक्षु डॉक्टरों द्वारा मारपीट की घटना हुई थी, जिसे अनुशासनहीनता माना गया। हालांकि, रैगिंग के आरोपों को जांच में निराधार पाया गया। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि शिकायतकर्ता प्रशिक्षु डॉक्टर ने पहले विवाद को उकसाया और बाद में खुद को बचाने के लिए रैगिंग का आरोप लगाया। जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि शिकायतकर्ता ने बाद में मामला वापस लेने के बदले सीनियर प्रशिक्षु डॉक्टरों से पैसों की मांग की थी।
कॉलेज के प्राचार्य डॉ. डी.के. वर्मा ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि जांच के निष्कर्षों के आधार पर दोनों थर्ड ईयर के प्रशिक्षु डॉक्टरों को एक वर्ष के लिए छात्रावास से और तीन महीनों के लिए कक्षाओं से निष्कासित किया गया है। इसके साथ ही दोनों पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। वहीं, शिकायत करने वाले सेकेंड ईयर के प्रशिक्षु डॉक्टर को छह सप्ताह के लिए छात्रावास से निष्कासित किया गया है और उस पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।डॉ. वर्मा ने यह भी बताया कि मारपीट में शामिल दोनों सीनियर प्रशिक्षु डॉक्टर पहले भी रैगिंग से जुड़े मामलों में संलिप्त रह चुके हैं, जिसके चलते उन्हें पूर्व में छह महीनों के लिए निलंबित किया जा चुका था। इस बार कॉलेज प्रबंधन ने अनुशासन के साथ-साथ सुधारात्मक कदम उठाते हुए तीनों प्रशिक्षु डॉक्टरों को काउंसलिंग के लिए भी भेजने का निर्णय लिया है।
कॉलेज प्रशासन का कहना है कि संस्थान में किसी भी तरह की हिंसा, अनुशासनहीनता या झूठी शिकायत को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों और छात्रों को सुरक्षित व अनुशासित शैक्षणिक माहौल मिल सके। यह मामला मेडिकल कॉलेजों में आपसी व्यवहार, तनाव प्रबंधन और शिकायत प्रणाली की गंभीरता को एक बार फिर रेखांकित करता है।