Shimla, 8 January-:हिमाचल प्रदेश में वर्षों से लंबित चले आ रहे राजस्व मामलों के समाधान के लिए राज्य सरकार ने एक अहम और व्यावहारिक कदम उठाया है। आम जनता को बार-बार तहसीलों और राजस्व कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत दिलाने के उद्देश्य से सरकार ने रिटायर्ड तहसीदारों और अन्य अनुभवी राजस्व कर्मचारियों को दोबारा सेवाओं में लेने का फैसला किया है। सरकार का मानना है कि इन अधिकारियों के अनुभव का लाभ उठाकर भूमि विवाद, इंतकाल, जमाबंदी सुधार और अन्य राजस्व मामलों का तेजी से निपटारा किया जा सकेगा।
दरअसल, हाल ही में उपायुक्त शिमला सहित अन्य जिलों में हुई समीक्षा बैठकों के दौरान यह सामने आया कि बड़ी संख्या में राजस्व मामले वर्षों से लंबित हैं। इन मामलों में निर्णय न होने के कारण आम लोगों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए प्रदेश सरकार ने यह वैकल्पिक व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है, जिससे न केवल लंबित मामलों का समाधान होगा बल्कि वर्तमान में कार्यरत अधिकारियों पर बढ़ता कार्यभार भी कम किया जा सकेगा।इस संबंध में अतिरिक्त मुख्य सचिव की ओर से सभी जिला उपायुक्तों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। आदेशों के तहत अब डीसी अपने-अपने जिलों में रिटायर्ड तहसीलदार, नायब तहसीलदार, कानूनगो और पटवारियों की पुनर्नियुक्ति कर सकेंगे। सरकार ने इसके लिए नियम और शर्तें भी तय की हैं ताकि पारदर्शिता बनी रहे और काम सुचारू रूप से आगे बढ़े।
पारिश्रमिक की बात करें तो सरकार ने अलग-अलग पदों के लिए मासिक मानदेय निर्धारित किया है। पुनर्नियुक्त तहसीलदार को 70 हजार रुपये, नायब तहसीलदार को 60 हजार रुपये, कानूनगो को 50 हजार रुपये और पटवारी को 40 हजार रुपये प्रति माह दिए जाएंगे। सरकार को उम्मीद है कि इस फैसले से राजस्व प्रशासन मजबूत होगा और आम जनता को लंबे समय से चली आ रही समस्याओं से राहत मिलेगी।