अंबाला। करीब 1540 करोड़ रुपये की लागत से बन रही चंडीगढ़–बद्दी रेल लाइन परियोजना पानी निकासी की व्यवस्था को लेकर विवादों में आ गई है। सेना ने इस प्रोजेक्ट में ड्रेनेज की कमी पर गंभीर आपत्ति जताई है। सैन्य अधिकारियों का कहना है कि यदि जल निकासी के उचित इंतजाम नहीं किए गए, तो मानसून के दौरान चंडी मंदिर मिलिट्री स्टेशन क्षेत्र में जलजमाव की स्थिति बन सकती है, जिससे सेना के बुनियादी ढांचे और उपकरणों को नुकसान पहुंचने का खतरा है।
इस संबंध में सेना की ओर से अंबाला रेल मंडल के अधिकारियों को लिखित शिकायत भेजी गई है। आरोप है कि परियोजना की प्रारंभिक ड्राइंग में जिस जल निकासी व्यवस्था का प्रावधान था, उसे निर्माण के दौरान बदल दिया गया है। रेलवे का कंस्ट्रक्शन विभाग इस परियोजना पर काम कर रहा है, लेकिन ड्रेनेज को लेकर उठे सवालों से प्रोजेक्ट की लागत और समयसीमा दोनों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
चंडीगढ़–बद्दी रेल लाइन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा चंडी मंदिर मिलिट्री स्टेशन से होकर गुजरता है। यहां रेलवे यार्ड का री-मॉडलिंग कार्य चल रहा है। पुराने ट्रैक के नीचे पहले से बने पांच कलवर्ट के साथ-साथ नए ट्रैक के नीचे भी पांच कलवर्ट तैयार किए गए हैं और एक नया रेल अंडर ब्रिज भी बनाया गया है। इसके बावजूद अधिकांश हिस्सों में प्रभावी जल निकासी की व्यवस्था नहीं होने से समस्या खड़ी हो गई है।
सेना ने इस मुद्दे के समाधान के लिए ड्रेनेज को घग्गर नदी की ओर मोड़ने जैसे सुझाव भी दिए हैं, हालांकि अभी इन पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है। वहीं, रेलवे अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
उल्लेखनीय है कि यह 33 किलोमीटर लंबी ब्रॉडगेज रेल लाइन केंद्र सरकार और हिमाचल प्रदेश सरकार की 50-50 लागत भागीदारी पर बन रही है। यह परियोजना बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ जैसे औद्योगिक क्षेत्रों को चंडीगढ़ से जोड़ेगी, जिससे माल ढुलाई और यात्रियों दोनों को सुविधा मिलेगी।