Kangra, Sanjeev-:हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पौंग झील के आसपास वन्य प्राणी विभाग की भूमि पर हो रही अवैध खेती को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि झील क्षेत्र में किसी भी प्रकार की खेती गैरकानूनी है और इससे जैव विविधता को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। कोर्ट ने वन्य प्राणी विभाग को निर्देश दिए हैं कि झील किनारे की गई बाड़बंदी और तारों को तत्काल हटाया जाए, ताकि पक्षियों और अन्य वन्य जीवों की आवाजाही बाधित न हो।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पौंग झील अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण वेटलैंड है, जहां हर साल बड़ी संख्या में विदेशी परिंदे आते हैं। झील के किनारे खेती करने से इन पक्षियों का प्राकृतिक आवास प्रभावित हो रहा है। साथ ही खेती में प्रयोग किए जा रहे रासायनिक उर्वरक और कीटनाशक पानी में मिलकर पक्षियों और अन्य जीव-जंतुओं के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन रहे हैं।अदालत ने यह भी साफ किया कि वन्य प्राणी विभाग की जमीन पर खेती करने का किसी भी व्यक्ति को कोई कानूनी अधिकार नहीं है। कोर्ट ने विभाग को निर्देश दिए हैं कि झील क्षेत्र में हो रही अवैध खेती की ड्रोन के माध्यम से तस्वीरें और रिपोर्ट तैयार कर अदालत में प्रस्तुत की जाएं, ताकि स्थिति की वास्तविकता सामने आ सके।इस फैसले का पर्यावरणविदों और प्रकृति प्रेमियों ने स्वागत किया है। उनका कहना है कि हाईकोर्ट का यह आदेश पौंग झील के संरक्षण की दिशा में एक अहम कदम है। इससे झील का पारिस्थितिक संतुलन बना रहेगा और प्रवासी पक्षियों सहित वन्य जीवों को सुरक्षित वातावरण मिलेगा।अब सबकी नजरें वन्य प्राणी विभाग पर टिकी हैं कि वह कोर्ट के निर्देशों को कितनी गंभीरता से लागू करता है और पौंग झील क्षेत्र को अवैध कब्जों और खेती से मुक्त कराने में कितनी तेजी दिखाता है।