सोनीपत | सोनीपत जिला बस अड्डे की वर्कशॉप इन दिनों गंभीर स्टाफ संकट से जूझ रही है। वर्कशॉप में 200 से अधिक पद स्वीकृत होने के बावजूद महज दो मैकेनिक तैनात हैं, जिसके कारण बसों की समय पर मरम्मत नहीं हो पा रही है। हालात यह हैं कि वर्कशॉप अप्रेंटिस के सहारे चल रही है और रोजाना आठ से दस बसें मरम्मत के इंतजार में खड़ी रह जाती हैं।
बसों की मरम्मत में हो रही देरी का सीधा असर रोडवेज संचालन पर पड़ रहा है। कई रूटों पर बसों की संख्या घटने से यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। वर्तमान में सोनीपत बस अड्डे में 150 से अधिक रोडवेज बसें मौजूद हैं, जिनकी नियमित सर्विस और फिटनेस जांच जरूरी होती है। मैकेनिकों की कमी के चलते न सिर्फ बसों की उपलब्धता घट रही है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
सोनीपत डिपो से 33 से अधिक रूटों पर बसों का संचालन किया जाता है। हालांकि, निजी बसों की संख्या बढ़ने से यात्रियों को कुछ राहत मिल रही है, लेकिन सरकारी बसों की कमी लगातार महसूस की जा रही है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि जल्द ही मैकेनिकों की भर्ती नहीं की गई तो हालात और बिगड़ सकते हैं।
गौरतलब है कि हाल ही में घटिया गुणवत्ता के एड ब्लू के कारण बीएस-6 श्रेणी की करीब 30 रोडवेज बसें खराब हो गई थीं। इन बसों के पंप फेल होने से उन्हें कई दिनों तक वर्कशॉप में खड़ा रखना पड़ा। मरम्मत पर लाखों रुपये खर्च हुए, वहीं मैकेनिकों की कमी के चलते काम भी काफी समय तक लंबित रहा।