Shimla, Sanju-:हिमाचल प्रदेश में मौसम की लगातार बेरुखी ने खेती और बागवानी को गहरे संकट में डाल दिया है। बीते कई महीनों से बारिश और बर्फबारी न होने के कारण प्रदेश के बागवान भारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। हिमाचल की खेती-बागवानी मुख्य रूप से वर्षा पर निर्भर रहती है, लेकिन मौजूदा हालात ने इस परंपरागत व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है। विशेषज्ञ इसे जलवायु परिवर्तन का प्रत्यक्ष प्रभाव मान रहे हैं, जिसका असर अब पहाड़ी राज्यों में भी साफ नजर आने लगा है।
बागवानों का कहना है कि पिछले करीब तीन महीनों से क्षेत्र में नाममात्र भी बारिश नहीं हुई है। लगातार सूखे की वजह से न केवल खड़ी फसलें प्रभावित हो रही हैं, बल्कि नए बाग लगाने का कार्य भी लगभग ठप हो गया है। 100 दिनों से अधिक समय तक बारिश न होने के कारण जल स्रोत सूखने लगे हैं और पानी की भारी किल्लत पैदा हो गई है। पहाड़ी इलाकों में सिंचाई के साधन सीमित होने के कारण किसान पूरी तरह प्रकृति पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में यदि जल्द मौसम में बदलाव नहीं हुआ, तो आने वाले समय में हालात और गंभीर हो सकते हैं।
बागवानों ने बताया कि मैदानी क्षेत्रों में ट्यूबवेल और नहरों के माध्यम से किसी हद तक सिंचाई संभव है, लेकिन हिमाचल जैसे पर्वतीय राज्य में बारिश और बर्फबारी के बिना खेती-बागवानी करना बेहद कठिन हो जाता है। लंबे समय से जारी सूखे का सीधा असर सेब, नाशपाती, आड़ू और अन्य फलों की पैदावार पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।इस बीच राजस्व एवं बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि बागवानी क्षेत्र के लिए बड़ी संख्या में पौधे पहले ही खरीदे जा चुके हैं।जिन क्षेत्रों में सीमित जल स्रोत उपलब्ध हैं, वहां किसी तरह प्लांटेशन का काम किया जा रहा है, लेकिन जहां पानी की सुविधा नहीं है, वहां स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में मौसम में बदलाव हो सकता है। अक्सर लोहड़ी के आसपास या 25–26 जनवरी के बाद अच्छी बर्फबारी देखने को मिलती रही है। यदि इसके बावजूद मौसम नहीं बदला, तो सरकार को बागवानों के हित में आगे की रणनीति पर गंभीरता से विचार करना पड़ेगा।