Kangra, Rahul-:कांगड़ा स्थित विश्वविख्यात श्री बज्रेश्वरी देवी मंदिर में मकर संक्रांति और घृत पर्व को लेकर पारंपरिक तैयारियां अंतिम चरण में हैं। मंदिर परिसर में देशी घी से मक्खन बनाने की प्राचीन प्रक्रिया विधिपूर्वक शुरू हो चुकी है। पुजारी वर्ग पूरी श्रद्धा और नियमों के पालन के साथ इस परंपरा को निभा रहा है, जो घृत पर्व की प्रमुख पहचान मानी जाती है।
मंदिर परंपरा के अनुसार, देशी घी को ठंडे पानी में 101 बार रगड़कर मक्खन तैयार किया जाता है। यह प्रक्रिया कठिन और समय-साध्य होती है। इस वर्ष लगभग 15 से 17 क्विंटल घी से मक्खन बनाने की योजना है। कड़ाके की ठंड के बावजूद पुजारी दिन-रात मेहनत कर इस धार्मिक कार्य को पूरा कर रहे हैं।
मकर संक्रांति के दिन माता बज्रेश्वरी देवी की पिंडी पर विशेष रूप से तैयार मक्खन का लेप चढ़ाया जाएगा। इसे घृतमंडल या घृत पर्व का मुख्य दिन माना जाता है। इस अवसर पर माता का भव्य श्रृंगार किया जाएगा, जो श्रद्धालुओं के लिए भक्ति और आस्था का प्रतीक है। मान्यता है कि इस विधि से माता की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
मुख्य पुजारी सीतांशु शर्मा ने बताया कि यह परंपरा प्राचीन शक्तिपीठ काल से चली आ रही है। उन्होंने कहा कि हर साल मक्खन की मात्रा में वृद्धि माता की महिमा और श्रद्धालुओं की गहरी आस्था को दर्शाती है। देश-विदेश से लोग इस अनूठी प्रक्रिया को देखने के लिए विशेष रूप से मंदिर आते हैं।मंदिर ट्रस्ट के सदस्य पंडित अशोक हिमाचली ने बताया कि ट्रस्ट मंदिर की परंपराओं को जीवित रखने में अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि इस बार मकर संक्रांति पर लगभग 15 क्विंटल मक्खन तैयार किया जा चुका है। पिछले वर्ष यह संख्या 23 क्विंटल थी। जैसे-जैसे देशी घी आएगा, मक्खन बनाना जारी रहेगा।
मंदिर अधिकारी शैवाली ठाकुर ने बताया कि मंदिर संचालन और घृतमंडल की सभी तैयारियों में प्रशासन पूरी तरह सक्रिय है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट सदस्यों के साथ समन्वय स्थापित किया गया है और सभी परंपराओं का पालन सुनिश्चित किया जा रहा है। मकर संक्रांति के अवसर पर तीन सांस्कृतिक संध्याओं का आयोजन किया जाएगा, जिसमें एक कार्यक्रम मंदिर परिसर में और दो अन्य ग्राउंड में होंगे।मंदिर परिसर में धार्मिक उल्लास और भक्तिमय माहौल बना हुआ है। अधिकारियों का अनुमान है कि मकर संक्रांति के दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ेगी।
सीतांशु शर्मा, मुख्य पुजारी – “प्राचीन परंपरा के अनुसार देशी घी से मक्खन बनाना श्रद्धालुओं के लिए विशेष अवसर है।”
पंडित अशोक हिमाचली, ट्रस्ट सदस्य – “घृतमंडल की तैयारी में ट्रस्ट का योगदान लगातार जारी है।”
शैवाली ठाकुर, मंदिर अधिकारी – “सभी परंपराओं का पालन और प्रशासनिक व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।”