Shimla, Sanju-:न्यूज़ीलैंड से सेब आयात पर इंपोर्ट ड्यूटी घटाए जाने के मुद्दे को लेकर हिमाचल प्रदेश सरकार और सेब उत्पादकों के बीच शिमला में अहम बैठक हुई। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी सहित सेब उत्पादक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। बैठक का मकसद आयात नीति से हिमाचल के सेब उद्योग पर पड़ने वाले असर पर चर्चा करना था।
बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि न्यूज़ीलैंड से अप्रैल से अगस्त के बीच सेब आयात होने से प्रदेश के बागवानों को भारी नुकसान होगा। इस अवधि में हिमाचल के अर्ली वैरायटी और हाई डेंसिटी प्लांटेशन (HDP) सेब बाजार में आते हैं। आयात बढ़ने से न केवल ताज़े सेब की कीमतें गिरेंगी, बल्कि कोल्ड स्टोर और कंट्रोल्ड एटमॉस्फियर (CA) में रखे सेब का कारोबार भी प्रभावित होगा।नेगी ने बताया कि इस मुद्दे पर विपक्ष के विधायकों को भी बैठक के लिए आमंत्रित किया गया था, लेकिन भाजपा का कोई भी विधायक इसमें शामिल नहीं हुआ। उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सेब उत्पादकों के हित में 1987 में शुरू की गई मार्केट इंटरवेंशन स्कीम (MIS) के लिए मिलने वाला केंद्रीय सहयोग बंद कर दिया गया। उनके अनुसार, मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद इस योजना को व्यावहारिक रूप से समाप्त कर दिया गया।
बागवानी मंत्री ने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में सेब पर 75 प्रतिशत इंपोर्ट ड्यूटी थी, जिसे भाजपा सरकार ने पहले घटाकर 50 प्रतिशत और अब 25 प्रतिशत कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार इस फैसले के खिलाफ आवाज़ उठाएगी और अंतरराष्ट्रीय समझौतों की समीक्षा की मांग करेगी, ताकि हिमाचल के सेब उत्पादकों के हितों की रक्षा की जा सके।