Mandi, Dharamveer-: मंडी जिला, जिसे ‘छोटी काशी’ के नाम से जाना जाता है, में मकर संक्रांति का पर्व हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया गया। यह पर्व माघ महीने की प्रथम तिथि को सूर्य देव के उत्तरायण होने के अवसर पर हर साल आयोजित किया जाता है। इस साल मकर संक्रांति पर षटतिला एकादशी का भी शुभ संयोग बन गया, जिससे पर्व का महत्त्व और बढ़ गया।
मंडी जिले के ततापानी में गर्म पानी के झरनों और चश्मों में लोगों ने पवित्र स्नान किया और देवी-देवताओं से आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर लोगों ने दान और पुण्य कार्यों में भी भाग लिया। आचार्य दिनेश शर्मा ने बताया कि इस दिन भगवान छह महीने के लिए जागते हैं, इसलिए हिंदू धर्म में इसे विशेष महत्व दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि इस दिन किए गए दान का फल अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है।जिला भर में उड़द की दाल की खिचड़ी बनाने की प्राचीन परंपरा निभाई गई। लोग सुबह-सुबह अपने घर पर खिचड़ी, देशी घी, दूध, दही और गुड़ के साथ भोग तैयार कर देवी-देवताओं को अर्पित करते हैं। इसके बाद इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया गया।स्थानीय निवासी दिनेश शर्मा और कमलदेव चौहान ने बताया कि वे मकर संक्रांति को माघ साजे के रूप में मनाते हैं और इसे ऋतु परिवर्तन का प्रतीक मानते हैं।
पर्व का महत्व केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक परिवर्तन से भी जुड़ा है। मकर संक्रांति के बाद सर्दियों का समापन होता है और धीरे-धीरे गर्मियों की शुरुआत होती है। हालांकि, इस साल मकर संक्रांति तक बारिश न होने की चिंता लोगों में स्पष्ट रूप से देखी गई और उन्होंने जल्द बारिश होने की कामना की।इस तरह मंडी जिले में मकर संक्रांति का पर्व धार्मिक आस्था, उत्साह और सामाजिक एकता के साथ मनाया गया।