जींद | जींद में प्रस्तावित हाइड्रोजन ट्रेन का ट्रायल फिलहाल टाल दिया गया है। ट्रेन में भरी जाने वाली हाइड्रोजन गैस के सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरने के कारण उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारियों के अनुसार, जब तक गैस की शुद्धता तय मानकों के अनुरूप प्रमाणित नहीं हो जाती, तब तक ट्रायल की अनुमति नहीं दी जाएगी।
हाइड्रोजन गैस की आपूर्ति गुरुग्राम समेत विभिन्न प्लांटों से की जानी है। प्लांट स्तर की लैब में शुरुआती जांच में गैस की गुणवत्ता ठीक पाई गई है, लेकिन सुरक्षा मानकों को देखते हुए बाहरी मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में भी सैंपल भेजे गए हैं। बुधवार को एक और सैंपल जांच के लिए रवाना किया गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की प्रक्रिया तय होगी।
रेलवे सूत्रों के मुताबिक, हाइड्रोजन ट्रेन के संचालन के लिए गैस का 99.99 प्रतिशत से अधिक शुद्ध होना अनिवार्य है। इसके साथ ही गैस में नमी की मात्रा अधिकतम पांच पीपीएम (पार्ट्स पर मिलियन) से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। यदि नमी तय सीमा से अधिक हुई तो इससे ट्रेन के फ्यूल सेल सिस्टम पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। ठंड के मौसम में नमी बढ़ने की आशंका के चलते विशेष सावधानी बरती जा रही है।
हाइड्रोजन ट्रेन एक जनवरी को जींद पहुंच चुकी है और फिलहाल हाइड्रोजन प्लांट परिसर में खड़ी है। यहां ट्रेन की वायरिंग और तकनीकी परीक्षण का कार्य जारी है। पांच जनवरी को लखनऊ से विशेष कोच के जरिए वायरिंग से जुड़ा उपकरण भी मंगवाया गया था। प्लांट में चार्जिंग प्वाइंट की व्यवस्था है, जहां ट्रेन की बैटरियों को चार्ज किया जा रहा है। इंजीनियरों की टीम रोजाना टेस्टिंग और तकनीकी जांच में जुटी हुई है।
जींद-सोनीपत रेल ट्रैक पर इसी महीने ट्रायल की योजना बनाई गई थी। इसके लिए आरडीएसओ (रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड ऑर्गनाइजेशन) की टीम भी जींद पहुंची थी, लेकिन कुछ तकनीकी खामियों और तैयारियों के अधूरे होने के कारण बिना ट्रायल किए ही टीम लौट गई। अब गैस की जांच पूरी होने और सभी सुरक्षा मानकों पर खरा उतरने के बाद ही ट्रायल की नई तारीख तय की जाएगी।