Shimla, 20 January-:जिले में एचआईवी/एड्स से प्रभावित बच्चों और व्यक्तियों को हर संभव सहायता उपलब्ध करवाने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह से संवेदनशील और सक्रिय है। यह बात उपायुक्त अनुपम कश्यप ने मंगलवार को आयोजित जिला सामुदायिक संसाधन समूह एवं जिला एड्स रोकथाम एवं नियंत्रण समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही। बैठक में एचआईवी/एड्स से संबंधित अभियानों, वर्तमान स्थिति और भविष्य की रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा की गई।
उपायुक्त ने बताया कि जिले में एचआईवी/एड्स से प्रभावित बच्चों, जिन्हें सीएबीए (चिल्ड्रन अफेक्टेड बाय एड्स) की श्रेणी में रखा जाता है, के मामलों की समीक्षा की गई। इस श्रेणी में 0 से 18 वर्ष तक के बच्चे शामिल होते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में जिले में 31 बच्चे एचआईवी से संक्रमित हैं। भारत सरकार और राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (नाको) द्वारा ऐसे बच्चों के लिए विशेष योजनाएं चलाई जा रही हैं, ताकि उन्हें सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी सुरक्षा मिल सके।उन्होंने स्पष्ट किया कि एचआईवी/एड्स अधिनियम के अंतर्गत प्रभावित बच्चों की संपत्ति और अन्य कानूनी अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाती है, ताकि उनके साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव न हो। सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में इन बच्चों को एआरटी (एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी) सहित आवश्यक दवाएं निःशुल्क उपलब्ध करवाई जा रही हैं। साथ ही, स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि बच्चों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाए, जिससे उन्हें सामाजिक उपेक्षा या भेदभाव का सामना न करना पड़े। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग द्वारा इन बच्चों की नियमित निगरानी भी की जा रही है।इसके उपरांत जिला एड्स रोकथाम एवं नियंत्रण समिति की बैठक में जिले में एचआईवी की वर्तमान स्थिति पर चर्चा की गई। बताया गया कि जिले में कुल 333 एचआईवी पॉजिटिव मामले दर्ज हैं।समिति का मुख्य उद्देश्य न केवल बीमारी की रोकथाम करना है, बल्कि समाज में फैली भ्रांतियों और भेदभाव को भी दूर करना है। उपायुक्त ने कहा कि एड्स कोई छुआछूत की बीमारी नहीं है और संक्रमित व्यक्तियों के प्रति सहानुभूति, सम्मान और सहयोग का भाव होना चाहिए।
उपायुक्त ने जानकारी दी कि जिला एड्स रोकथाम एवं नियंत्रण समिति के अंतर्गत जिला सामुदायिक संसाधन समूह कार्य कर रहा है, जो विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों के सहयोग से प्रभावित व्यक्तियों को समाज की मुख्यधारा में लाने का प्रयास कर रहा है। प्रदेश और केंद्र सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से प्रभावितों को जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इस वित्तीय वर्ष के दौरान 50 लोगों को टेलरिंग का प्रशिक्षण दिया गया है, जबकि 20 लोगों को कंप्यूटर कोर्स करवाया गया है। इसके अतिरिक्त अन्य योजनाओं के माध्यम से भी कौशल विकास प्रशिक्षण उपलब्ध करवाया जा रहा है।
बैठक में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति पर भी चिंता व्यक्त की गई। उपायुक्त अनुपम कश्यप ने कहा कि नशे के आदी युवाओं में एचआईवी संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं, विशेषकर सिरिंज के माध्यम से नशा लेने वाले युवाओं में यह खतरा अधिक है। उन्होंने इसे गंभीर चिंता का विषय बताते हुए आम जनता से अपील की कि समय-समय पर एचआईवी जांच करवाएं। साथ ही, नशे से दूर रहें और अभिभावक अपने बच्चों की गतिविधियों पर सतर्क निगरानी रखें।उन्होंने कहा कि यदि एचआईवी का समय रहते पता चल जाए और चिकित्सकों की सलाह अनुसार दवाइयों और परहेज का पालन किया जाए, तो संक्रमित व्यक्ति भी स्वस्थ और सम्मानजनक जीवन जी सकता है।इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. यशपाल रांटा, जिला एड्स कार्यक्रम अधिकारी डॉ. तहसीन, जिला टीबी कार्यक्रम अधिकारी डॉ. विनीत लखनपाल, प्रोजेक्ट मैनेजर दीपिका विमल, मेडिकल अधिकारी डॉ. निधि सहित अन्य संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।