Dharamshala, Rahul-:कांगड़ा ज़िले में हिमाचल प्रदेश के अन्य जिलों की तुलना में सबसे अधिक गेहूं की खेती की जाती है, लेकिन इस बार बीते तीन महीनों से बारिश न होने के कारण रबी फसलों की बढ़वार पर प्रतिकूल असर देखने को मिल रहा है। खेतों में नमी की कमी साफ तौर पर महसूस की जा रही है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। शुष्क मौसम की इस स्थिति को देखते हुए कृषि विभाग ने अलर्ट मोड में आते हुए किसानों को जागरूक करना शुरू कर दिया है।
कृषि विभाग का कहना है कि रबी फसल के शुरुआती विकास के लिए मिट्टी में नमी बेहद ज़रूरी होती है। हालांकि, बीते बरसात के मौसम में ज़मीन में बनी नमी अभी तक कुछ हद तक फसल को सहारा दे रही है, लेकिन यदि सूखे का यह दौर और लंबा चला तो फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में विभाग की ओर से किसानों को वैकल्पिक सिंचाई साधनों को अपनाने की सलाह दी जा रही है।कृषि विभाग द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के तहत ड्रिप इरिगेशन और स्प्रिंकलर सिस्टम को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे कम पानी में भी खेतों की सिंचाई संभव हो सके। इन उपकरणों पर किसानों को अनुदान भी उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अलावा कांगड़ा क्षेत्र में मौजूद पारंपरिक कूहलों के माध्यम से भी सिंचाई की जा रही है, हालांकि इनमें पानी की मात्रा कम आंकी जा रही है। बावजूद इसके, किसान आपसी सहयोग से इन संसाधनों का उपयोग कर रहे हैं।
वहीं, पीले रतुए जैसी बीमारियों को लेकर भी कृषि विभाग सतर्क है। इसके लिए विशेष टीमों का गठन किया गया है और एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। फिलहाल जिले में कहीं से भी बीमारी की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन विभाग पूरी तरह से निगरानी बनाए हुए है।