Shimla, 22 January-:हिमाचल प्रदेश में निर्मित दवाओं की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हाल ही में हुई जांच में प्रदेश में बनी 50 दवाएं मानकों पर खरी नहीं उतर पाईं, जबकि देशभर में कुल 167 दवाओं के सैंपल फेल पाए गए हैं। यह खुलासा राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं और केंद्रीय औषधि नियंत्रण संगठन (सीडीएसओ) की रिपोर्ट में हुआ है।
जिला स्तर पर बात करें तो सोलन जिले में सबसे अधिक 37 दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं। इसके अलावा सिरमौर में 11, जबकि ऊना और कांगड़ा जिले में एक-एक दवा कंपनी के सैंपल मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए। ये दवाएं बैक्टीरियल संक्रमण, उच्च रक्तचाप, अल्सर, एलर्जी, खांसी, अस्थमा, एसिडिटी, कोलेस्ट्रोल, गठिया दर्द, खून को पतला करने और थक्के रोकने जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज में उपयोग की जाती हैं।राज्य प्रयोगशाला द्वारा जांचे गए देशभर के 93 सैंपलों में से 31 हिमाचल की दवाएं फेल पाई गईं। वहीं सीडीएसओ द्वारा जांचे गए 74 सैंपलों में से 19 दवाएं हिमाचल में बनी हुई थीं, जो गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरीं। कई जानी-मानी फार्मा कंपनियों जैसे थियोन फार्मा, माया बायोटेक, जी लेबोट्री, हिल्लर लैब, मार्टिन एंड ब्राउन, अल्ट्रा ड्रग, एथेन लाइफ साइंस और अन्य के सैंपल जांच में असफल रहे हैं।
इन दवाओं में बीपी, एलर्जी, संक्रमण, एसिडिटी, खांसी, बुखार, उल्टी, नसों के दर्द, पेट के कीड़े, कैल्शियम, विटामिन और एंटीबायोटिक जैसी दवाएं शामिल हैं। कुछ मामलों में एक ही कंपनी की एक से अधिक दवाओं के सैंपल फेल पाए गए, जिससे निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन कंपनियों के सैंपल फेल हुए हैं, उनके खिलाफ ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। बाजार से संबंधित दवाओं का स्टॉक वापस मंगवाया जाएगा और दोबारा जांच की जाएगी। सभी संबंधित कंपनियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया जाएगा। विभाग का कहना है कि मरीजों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया