फरीदाबाद। केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला का डिजिटल विस्तार करने की घोषणा की है। इस पहल से शिल्पकार अब केवल मेले के दौरान ही नहीं, बल्कि पूरे वर्ष अपने हस्तनिर्मित उत्पादों को ऑनलाइन वैश्विक स्तर पर बेच सकेंगे। यह कदम आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती देगा और ग्रामीण कारीगरों की आर्थिक स्थिति सुधारने में मदद करेगा।
सूरजकुंड मेले के सभागार में आयोजित पत्रकार वार्ता में केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय के सचिव डा. श्रीवत्स कृष्ण ने बताया कि यह ऑनलाइन प्लेटफॉर्म शिल्पकारों के हुनर को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुँचाने का अवसर देगा। उन्होंने कहा, “सूरजकुंड मेला केवल एक आयोजन नहीं है, बल्कि यह हमारे पारंपरिक शिल्पकारों के लिए एक ग्लोबल लॉन्चपैड है। डिजिटल विस्तार से उनका बाजार अब पूरी दुनिया तक पहुँचेगा।”
इस अवसर पर आयुक्त एवं सचिव डा. अमित अग्रवाल, पर्यटन निगम के निदेशक पार्थ गुप्ता, और सूचना जनसंपर्क एवं भाषा विभाग की अतिरिक्त निदेशक वर्षा खांगवाल भी मौजूद रहे।
केंद्रीय सचिव ने बताया कि मेले की अवधि को भविष्य में दो सप्ताह से बढ़ाकर चार सप्ताह करने पर विचार किया जा रहा है। इससे न केवल मेले में आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए शिल्पकारों की बिक्री भी अधिकतम होगी।
डा. श्रीवत्स ने पर्यटकों से अपील की कि वे ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को सार्थक करें और शिल्पकारों द्वारा बनाए गए हस्तनिर्मित उत्पादों की खरीदारी करें। उनका कहना था कि इस पहल का उद्देश्य शिल्पियों को पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाना और केवल हस्तनिर्मित, पारंपरिक उत्पादों को बढ़ावा देना है।
इस डिजिटल प्लेटफॉर्म से कारीगर सालभर अपने उत्पाद बेच सकेंगे, जिससे ग्रामीण कारीगरों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान और स्थायी आय का अवसर मिलेगा।