Bilaspur, Subhash-:हिमाचल प्रदेश राजकीय संस्कृत शिक्षक परिषद ने टीजीटी संस्कृत शिक्षकों की पदोन्नति को लेकर शिक्षा विभाग द्वारा जारी पत्र पर गंभीर आपत्ति जताई है। परिषद का कहना है कि वर्तमान पदोन्नति व्यवस्था में तकनीकी विसंगति है, जिससे संस्कृत शिक्षक स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। परिषद ने सरकार से इस त्रुटि को तुरंत ठीक करने की मांग की है।
बिलासपुर में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान परिषद के प्रदेश अध्यक्ष कमलकांत गौतम ने कहा कि वर्तमान में टीजीटी संस्कृत शिक्षकों को पदोन्नति के नाम पर उसी टीजीटी संस्कृत पद पर नियुक्त किया जा रहा है, जो नियमों और पदोन्नति की मूल भावना के विपरीत है। उन्होंने कहा कि पदोन्नति का तात्पर्य उच्च पद और अधिक जिम्मेदारी से होता है, न कि उसी पद पर बने रहना। इसे उन्होंने एक उदाहरण से स्पष्ट करते हुए कहा कि यह ठीक वैसा ही है जैसे किसी अधिकारी को पदोन्नत कर पुनः उसी पद पर नियुक्त कर दिया जाए।कमलकांत गौतम ने बताया कि इस विसंगति को लेकर परिषद का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से भी मुलाकात कर चुका है। मुख्यमंत्री ने संस्कृत शिक्षकों के हितों के प्रति सकारात्मक रुख अपनाते हुए इस विषय पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि संस्कृत शिक्षक सरकार के साथ खड़े हैं, लेकिन इस प्रकार की तकनीकी खामियों का निराकरण आवश्यक है।परिषद ने यह मांग भी उठाई कि प्रदेश में ऐसे कई संस्कृत शिक्षक कार्यरत हैं, जो बिना बी.एड. के शास्त्री पद पर सेवाएं दे रहे हैं। उनके लिए बी.एड. करने का अवसर प्रदान किया जाना चाहिए। प्रदेश विश्वविद्यालयों में बी.एड. की कई सीटें रिक्त पड़ी हैं, जिन्हें ब्रिज कोर्स के माध्यम से भरकर इन शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा सकता है।
गौतम ने बताया कि परिषद की राज्य स्तरीय बैठक कुमार आर्मी के टकरेड़ा स्थित शिव मंदिर में आयोजित की गई, जिसमें संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार और शिक्षकों के सशक्तिकरण पर विस्तार से चर्चा की गई। पत्रकार वार्ता में परिषद के संरक्षक मनोज शैल व सोहनलाल, संगठन मंत्री ललित शर्मा और महासचिव डॉ. अमनदीप भी उपस्थित रहे।