चंडीगढ़। केवल भाषण और दावों से नेतृत्व सफल नहीं होता, बल्कि जनता के बीच जाकर काम करना ही असली कसौटी है। नेताओं से लोग उम्मीद करते हैं कि वे अपने वादों को जमीन पर उतारें। यदि ऐसा नहीं होता, तो जनता चुनाव के जरिए उन्हें सत्ता से बाहर कर देती है। यह विचार पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने व्यक्त किए। वे लोक भवन में आयोजित छह दिवसीय आवासीय नेतृत्व विकास कार्यक्रम “नेतृत्व साधना” के संवाद सत्र को संबोधित कर रहे थे।
यह कार्यक्रम समावेशी नीति एवं सुशासन संस्थान (आईआईपीजी), चंडीगढ़ द्वारा रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी के सहयोग से आयोजित किया गया। प्रशासक कटारिया ने प्रतिभागियों से आह्वान किया कि वे नेतृत्व क्षमता का विकास करते हुए जनसेवा को अपनी प्राथमिकता बनाएं और जमीनी स्तर पर लोगों की समस्याओं को समझें।
नेतृत्व साधना के 17वें संस्करण का आयोजन 29 जनवरी से 3 फरवरी 2026 तक राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (एनआईटीटीटीआर), चंडीगढ़ में किया गया। इसमें देश के नौ राज्यों : मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, गुजरात, उत्तराखंड, पंजाब सहित अन्य राज्यों से 38 प्रतिभागियों ने भाग लिया। छह दिनों के दौरान कुल 18 गहन सत्र आयोजित हुए, जिनमें नेतृत्व, सुशासन, सार्वजनिक नीति, राष्ट्र निर्माण और समकालीन राष्ट्रीय मुद्दों पर व्यापक चर्चा की गई।

कार्यक्रम का उद्घाटन रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी के उपाध्यक्ष डॉ. विनय सहस्रबुद्धे ने किया। उन्होंने मूल्य आधारित नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका को रेखांकित किया। पूर्व सांसद अविनाश राय खन्ना ने संसदीय प्रक्रिया और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर विस्तार से जानकारी दी। वहीं डॉ. प्रशांत शाही ने विचार निर्माण और नेतृत्व कौशल पर सत्र लिए, जबकि उमेंद्र दत्त ने कृषि, समाज और राष्ट्रीय विकास के आपसी संबंधों पर प्रकाश डाला।
प्रतिभागियों ने आईआईटी रोपड़ का शैक्षणिक भ्रमण भी किया, जहां तकनीकी नवाचार और अनुसंधान गतिविधियों को समझने का अवसर मिला। कार्यक्रम के दौरान “एक राष्ट्र–एक चुनाव”, राष्ट्र निर्माण में स्वयंसेवी संगठनों की भूमिका, सार्वजनिक भाषण कला, सूचना का अधिकार, तनाव प्रबंधन और व्यक्तिगत प्रभावशीलता जैसे विषयों पर भी प्रशिक्षण दिया गया।
समापन सत्र में एनआईटीटीटीआर चंडीगढ़ के निदेशक भोला राम गुर्जर और सेवा ही संकल्प संस्था के अध्यक्ष मनोज चंदेल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने युवाओं को संघर्षों से सीख लेकर लक्ष्य प्राप्ति और राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम निदेशक डॉ. मनीष जांगिड़ ने कहा कि नेतृत्व साधना का यह संस्करण युवाओं को भारतीय दृष्टिकोण से राष्ट्रीय और वैश्विक विमर्श को समझने में सफल रहा है। उन्होंने बताया कि भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि युवा राष्ट्र निर्माण में सक्रिय और प्रभावी भूमिका निभा सकें।