जींद। जिले में राजस्व विभाग से जुड़े कामकाज पूरे सप्ताह प्रभावित रहे। पहले पटवारियों की हड़ताल और अब तहसीलदार व नायब तहसीलदारों की हड़ताल के कारण आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लगातार दूसरे दिन भी तहसीलदार और नायब तहसीलदार हड़ताल पर रहे, जिससे जिले में रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी तरह ठप हो गई।
हड़ताल का असर इतना गंभीर रहा कि शुक्रवार को भी एक भी रजिस्ट्री नहीं हो सकी। जिले में रोजाना औसतन करीब 120 रजिस्ट्री होती हैं, जबकि इसी दौरान इंतकाल, जमाबंदी, जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र समेत कई जरूरी दस्तावेज भी जारी किए जाते हैं। लेकिन हड़ताल के चलते ये सभी सेवाएं प्रभावित रहीं।
अब शनिवार और रविवार को तहसील कार्यालय बंद रहने के कारण लोगों को कम से कम दो दिन और इंतजार करना पड़ेगा, जिससे समस्या और बढ़ने की संभावना है। कई लोग दूसरे जिलों और प्रदेशों से रजिस्ट्री कराने जींद आते हैं, लेकिन उन्हें बिना काम कराए वापस लौटना पड़ा।
अमेरिका से आई NRI महिला का जीपीए पंजीकरण भी नहीं हो पाया
हड़ताल के कारण अमेरिका में रह रही एनआरआई रीतू ढांडा का जींद में जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA) पंजीकरण नहीं हो सका। उन्होंने सभी दस्तावेज पूरे कर लिए थे और तत्काल टोकन लेकर 25 हजार रुपये (नॉन-रिफंडेबल) शुल्क भी जमा किया था।
रीतू ढांडा ने बताया कि वह 29 जनवरी को भारत आई थीं और 9 फरवरी की सुबह उनकी अमेरिका वापसी तय है। उनका उद्देश्य सिर्फ अपने पारिवारिक और पैतृक मामलों को लेकर जींद में जीपीए पंजीकृत कराना था, ताकि बार-बार भारत आने की मजबूरी न रहे। यह जीपीए उनके पिता स्वर्गीय प्रेम प्रकाश सिंह के निधन के बाद जरूरी हो गया था।
उन्होंने बताया कि बुधवार तक उनका सामान्य टोकन स्वीकृत नहीं किया गया। गुरुवार को कार्यालय पहुंचने पर बताया गया कि हड़ताल है, लेकिन कर्मचारियों ने भरोसा दिलाया कि शुक्रवार को तत्काल टोकन लेकर काम हो जाएगा। शुक्रवार को भी वह पूरे दस्तावेजों के साथ तहसील कार्यालय पहुंचीं और अधिकारियों से लगातार निवेदन करती रहीं, लेकिन किसी अधिकारी ने फाइल लेने या प्रक्रिया आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी नहीं ली। उन्हें फिर हड़ताल का हवाला देकर वापस भेज दिया गया।
25 हजार शुल्क पर उठे सवाल, सामाजिक संगठन ने डीसी से की मुलाकात
इस मामले को लेकर सामाजिक संगठन अन्ना टीम जींद ने प्रभावित महिला और अन्य नागरिकों के साथ डीसी मोहम्मद इमरान रजा से मुलाकात की। संगठन सदस्य हितेश ने बताया कि डीसी ने नायब तहसीलदार को बुलाकर समाधान निकालने के निर्देश दिए, लेकिन नायब तहसीलदार ने हड़ताल का हवाला देकर असमर्थता जता दी।
संगठन ने सवाल उठाया कि जब हड़ताल की स्थिति पहले से थी, तो नागरिकों से तत्काल शुल्क लेकर टोकन क्यों जारी किए गए। साथ ही मांग की गई कि 25 हजार रुपये तत्काल टोकन शुल्क पेनल्टी सहित वापस किया जाए।
अन्ना टीम जींद ने मुख्यमंत्री को ईमेल भेजकर भी मांग की है कि विभागीय हड़ताल और प्रशासनिक अव्यवस्था के कारण काम नहीं हो पाया, जबकि आवेदक की ओर से कोई गलती नहीं थी, इसलिए शुल्क वापस किया जाना चाहिए।
लोगों ने बताया दर्द: बार-बार चक्कर लगाकर भी नहीं हुआ काम
रूपगढ़ निवासी जोगीराम ने बताया कि वह प्लॉट की रजिस्ट्री कराने आए थे, लेकिन तहसीलदार हड़ताल पर होने के कारण काम नहीं हो सका। कर्मचारियों ने शुक्रवार को काम होने की बात कही थी, लेकिन शुक्रवार को भी रजिस्ट्री नहीं हो पाई।
भगत सिंह कॉलोनी निवासी जोगेंद्र सिंह ने बताया कि ऑनलाइन रजिस्ट्री के लिए तहसीलदार के डिजिटल हस्ताक्षर जरूरी थे, लेकिन हड़ताल के चलते प्रक्रिया अटक गई। उन्होंने कहा कि बार-बार तहसील कार्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं और ऑनलाइन प्रक्रिया में उपभोक्ताओं को ज्यादा परेशानी होती है।
बराह खुर्द निवासी बलबीर ने कहा कि गांव में प्लॉट की निशानदेही के लिए तहसीलदार के हस्ताक्षर जरूरी थे, लेकिन एक सप्ताह से पटवारियों और तहसीलदारों की हड़ताल के चलते काम नहीं हो पाया।
डीसी बोले: पूरे प्रदेश में एसोसिएशन की हड़ताल
डीसी मोहम्मद इमरान रजा ने बताया कि उनके पास अमेरिका से आई महिला सहित कई लोग शिकायत लेकर आए थे। उन्होंने नायब तहसीलदार को समाधान के निर्देश दिए थे, लेकिन पूरे प्रदेश में एसोसिएशन की हड़ताल के कारण जिले में भी राजस्व विभाग के अधिकारी हड़ताल पर हैं, जिससे कार्य प्रभावित हो रहा है।