चंडीगढ़। हरियाणा भाजपा के पूर्व अध्यक्ष एवं राज्यसभा सदस्य सुभाष बराला ने राज्यसभा में देश में लगातार गहराते भूजल संकट पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि हरियाणा सहित कई राज्यों में सेम (जलभराव) की बढ़ती समस्या और भूजल में आर्सेनिक की बढ़ती मात्रा स्वास्थ्य और कृषि दोनों के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है।
बराला ने बताया कि यह समस्या अब केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संकट का रूप ले चुकी है। केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि देश के कई हिस्सों में भूजल में आर्सेनिक की मात्रा तय मानकों से कहीं अधिक पाई जा रही है। अकेले हरियाणा के 18 जिलों में भूजल में आर्सेनिक की मौजूदगी सामने आई है, जिससे पीने के पानी की गुणवत्ता बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
उन्होंने चेतावनी दी कि आर्सेनिक युक्त पानी का लंबे समय तक सेवन करने से कैंसर, हृदय रोग, त्वचा संबंधी बीमारियां, बच्चों में गंभीर रोग और मानसिक विकार जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसका सीधा असर आमजन के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।
सुभाष बराला ने कहा कि यह संकट स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि कृषि भूमि की उर्वरता को भी नुकसान पहुंचा रहा है। आर्सेनिक प्रदूषण और जलभराव के कारण मिट्टी की गुणवत्ता कमजोर हो रही है, जिससे किसानों की फसल उत्पादन क्षमता और आय दोनों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के माध्यम से कम आर्सेनिक अवशोषण वाली फसल किस्मों के अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा दिया जाए। साथ ही हरियाणा जैसे सेमग्रस्त क्षेत्रों में स्थायी और प्रभावी जल निकासी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
बराला ने मांग की कि प्रभावित इलाकों में नहरी एवं सतही जल आधारित सिंचाई परियोजनाओं को शीघ्र पूरा किया जाए और हरियाणा में संचालित “मेरा पानी-मेरी विरासत” जैसी योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए केंद्र सरकार विशेष सहयोग प्रदान करे।
उन्होंने कहा कि यदि समय रहते ठोस और वैज्ञानिक कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में यह संकट और भी भयावह हो सकता है। भाजपा सांसद ने केंद्र सरकार से भूजल प्रदूषण, आर्सेनिक संकट और जलभराव जैसी समस्याओं से निपटने के लिए समन्वित, दीर्घकालिक और वैज्ञानिक नीति बनाने की अपील की, ताकि आम नागरिकों के स्वास्थ्य, किसानों की आजीविका और कृषि की स्थिरता को सुरक्षित रखा जा सके।