मंडी, धर्मवीर-:सुंदरनगर उपमंडल के अंतर्गत निहरी तहसील के कमांद गांव में स्थित देव बाला टीका की नई देहुरी यानी नए मंदिर की मंगलवार को विधिवत प्रतिष्ठा संपन्न हुई। इस ऐतिहासिक अवसर पर क्षेत्र भर से श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ा और पूरे क्षेत्र में धार्मिक उल्लास का माहौल देखने को मिला।
मंदिर कमेटी के अनुसार देव बाला टीका की नई देहुरी का निर्माण लगभग 500 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद किया गया है। यह स्थान देवता का मूल निवास स्थल माना जाता है, जिसे स्थानीय बोली में देहुरी कहा जाता है। इससे कुछ दूरी पर देवता का भंडार स्थित है, जहां देवता का रथ रखा जाता है। इससे पूर्व यहां एक छोटा सा मंदिर मौजूद था, जो वर्षों तक लोगों की आस्था का केंद्र बना रहा, लेकिन अब उसी स्थान पर भव्य और आकर्षक मंदिर का निर्माण किया गया है।
देव बाला टीका के कटवाल खेम राज ने बताया कि मंदिर निर्माण पर करीब 60 लाख रुपये से अधिक की राशि खर्च की गई है। यह संपूर्ण धनराशि क्षेत्रवासियों और श्रद्धालुओं द्वारा जनसहयोग से एकत्र की गई है। मंदिर का निर्माण कार्य लगभग एक वर्ष पूर्व शुरू किया गया था, जो अब पूर्ण होकर तैयार हो चुका है। मंदिर का निर्माण पारंपरिक शैली में लकड़ी से किया गया है, जिस पर स्थानीय कारीगरों द्वारा की गई बारीक और भव्य नक्काशी श्रद्धालुओं का मन मोह लेती है।
देव बाला टीका के गुर गंगा राम ने जानकारी देते हुए बताया कि देव बाला टीका, मंडी जनपद के आराध्य देव बड़ा देव कमरूनाग के ज्येष्ठ पुत्र हैं। इन्हें विशेष रूप से रोगों से मुक्ति दिलाने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि यह वरदान उन्हें अपने पिता से प्राप्त हुआ है।उन्होंने बताया कि देव बाला टीका के प्रति न केवल क्षेत्र के लोगों, बल्कि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं की भी गहरी आस्था है। श्रद्धालु सच्चे मन से देवता के दरबार में जो भी कामना करते हैं, वह पूर्ण होती है। मंदिर प्रतिष्ठा समारोह के दौरान पारंपरिक वाद्य यंत्रों, देव नृत्य और धार्मिक अनुष्ठानों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।