चंडीगढ़ | हरियाणा में तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों की हड़ताल का असर सोमवार को राज्य के तहसीलों और उप तहसीलों में साफ दिखा। राजस्व विभाग ने पंजीकरण कार्य को डीआरओ (जिला राजस्व अधिकारी) और एसडीएम (सहायक जिला मजिस्ट्रेट) के माध्यम से संभालने का निर्णय लिया था, लेकिन पहले दिन काम बेहद धीमा रहा। प्रदेश की 143 तहसीलों व उप तहसीलों में पंजीकरण संबंधित कार्य दोपहर तक ही शुरू हो पाया।
अधिकतर जिलों में डीआरओ और एसडीएम या तो विभागीय बैठकों में गए हुए थे या अवकाश पर थे। इससे केवल कुछ ही तहसीलों में रजिस्ट्री का काम पूरा हो सका। रोहतक में पांच, बहादुरगढ़ में एक और करनाल में 163 टोकन लगे, लेकिन अधिकांश पंजीकरण नहीं हो पाए। सोनीपत, हिसार और पानीपत में भी अधिकारी अपनी व्यस्तताओं के कारण कार्य नहीं कर पाए।
हड़ताल को खत्म कराने के प्रयास भी शुरू हो गए हैं। सोमवार को गुरुग्राम में हरियाणा रेवेन्यू ऑफिसर एसोसिएशन के पदाधिकारियों और भू अभिलेख निदेशालय के निदेशक डॉ. यशपाल के बीच वार्ता हुई। एसोसिएशन ने वजीराबाद के तहसीलदार के निलंबन को वापस लेने समेत चार प्रमुख मांगें रखीं। निदेशक ने आश्वासन दिया कि इन मामलों को उच्चाधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा।
एसोसिएशन की चार प्रमुख मांगों में शामिल हैं: वजीराबाद के तहसीलदार का निलंबन वापस लेना, नायब तहसीलदारों पर की गई कार्रवाई वापस लेना, पुलिस महानिदेशक द्वारा जारी पत्र को रद्द कराना जिसमें भ्रष्टाचार मामलों में कार्रवाई का प्रावधान था, और अवैध जमीन से संबंधित रजिस्ट्री प्रक्रिया को मुख्यालय स्तर से ही नियंत्रित करना।
राजस्व विभाग के अनुसार सोमवार को कुल 541 टोकन लगे थे, जिनमें से केवल 19 डीड पूरी हो पाईं। शेष 524 टोकन का ऑनलाइन भुगतान जमा हुआ, लेकिन पंजीकरण नहीं हो सका। तहसील स्तर पर ऑनलाइन पोर्टल और लॉगिन आईडी की समस्याओं के कारण भी काम अटका रहा।
सभी प्रयासों के बावजूद डीआरओ और एसडीएम की व्यस्तता, विभागीय बैठकों, प्रशिक्षण और अवकाश की वजह से अधिकांश तहसीलों में रजिस्ट्री का काम प्रभावी ढंग से नहीं चल पाया।