नई दिल्ली। केन–बेतवा लिंक परियोजना के तहत विस्थापित किए जा रहे गांवों के ग्रामीण पिछले पांच दिनों से निर्माण क्षेत्र में धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें न तो निर्धारित मुआवजा समय पर दिया जा रहा है और न ही पुनर्वास के तहत आवास उपलब्ध कराए गए हैं।
धरने का नेतृत्व कर रहे अमित भटनागर की धारा 170 के तहत गिरफ्तारी के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए। मंगलवार रात करीब 11 बजे आक्रोशित ग्रामीणों ने बिजावर तहसील का घेराव कर दिया, जो बाद में पथराव में बदल गया। सूचना मिलते ही एसडीएम बिजावर मौके पर पहुंचे, लेकिन ग्रामीणों ने उनका भी घेराव कर लिया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को सुरक्षा व्यवस्था संभालनी पड़ी।
इस दौरान अमित भटनागर की रिहाई को लेकर काफी देर तक हंगामा चलता रहा। प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति की रिहाई कानून के दायरे में ही होगी और किसी भी प्रकार के दबाव में आकर कार्रवाई नहीं की जाएगी।
क्या है पूरा मामला
ढोडन बांध क्षेत्र से विस्थापित ढोडन, पलकोंहा और खरयानी गांवों के ग्रामीण निर्माण कार्य को रोक रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि एसडीएम बिजावर ने 10 जनवरी 2026 तक मुआवजा राशि संबंधित विस्थापितों के खातों में जमा कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन तय समय बीत जाने के बावजूद अभी तक भुगतान नहीं किया गया है। इसी को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है और आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है।