फाजिल्का | पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने सीमावर्ती जिले फाजिल्का में नशा विरोधी जागरूकता अभियान में हिस्सा लिया, लेकिन राजनीतिक नेताओं की उदासीनता ने उन्हें गहरा निराश किया।
राज्यपाल ने लालबत्ती चौंक से घंटाघर तक पैदल मार्च का नेतृत्व किया, जिसमें जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, स्कूली छात्र और शहर के गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए। हाथों में नशा विरोधी तख्तियां लेकर और नारे लगाते हुए इस काफिले ने शहरवासियों को नशे से दूर रहने का संदेश दिया।
इस अभियान में भाजपा नेता गुरमीत सिंह सोढ़ी सहित कुछ भाजपा नेता शामिल हुए, लेकिन सत्ताधारी आम आदमी पार्टी के किसी भी नेता ने भाग नहीं लिया। राज्यपाल कटारिया ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा, “मैंने इस अभियान की सफलता के लिए सभी बड़े और छोटे नेताओं को व्यक्तिगत रूप से बुलाया। मैंने धर्मगुरुओं और वर्तमान तथा पूर्व सांसद, विधायक, राज्यसभा सदस्यों को भी आमंत्रित किया। फिर भी कोई भी AAP का नेता उपस्थित नहीं हुआ, और कांग्रेस के नेताओं में से भी कोई शामिल नहीं हुआ।”
राज्यपाल ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य राजनीतिक फ़ायदे या विपक्ष का खेल नहीं है। “मैं संविधान की मर्यादा पर किसी भी हालत में आंच नहीं आने दूंगा। मेरा एक ही मकसद है – पंजाब के युवाओं को नशे से बचाना। चाहे राजनीतिक नेता साथ दें या न दें, यह अभियान जारी रहेगा।”
इस जागरूकता मार्च ने शहरवासियों को नशे के खिलाफ सामाजिक संदेश देने के साथ-साथ राजनीतिक उदासीनता और नेताओं की भागीदारी की कमी को भी उजागर किया।