धर्मशाला, राहुल-:केवल सिंह पठानिया ने हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में व्यावसायिक स्नातक (बी.वॉक) पाठ्यक्रम को शिक्षा की मुख्यधारा में शामिल करने की जोरदार मांग उठाई। इस पहल से प्रदेश के हजारों विद्यार्थियों, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं में नई उम्मीद जगी है। उन्होंने सदन में कहा कि यह पाठ्यक्रम केवल डिग्री प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि सीधे रोजगार से जुड़ा सशक्त माध्यम बन चुका है।
उन्होंने जानकारी दी कि इस योजना को लगभग दस वर्ष पूर्व एशियाई विकास बैंक के सहयोग से आरंभ किया गया था। समय के साथ इसके परिणाम अत्यंत सकारात्मक रहे, जिसके बाद राज्य सरकार और शिक्षा विभाग ने अपने बजट से इसका संचालन जारी रखा। उन्होंने आग्रह किया कि अब इसे स्थायी रूप से मुख्यधारा में स्थान दिया जाए ताकि विद्यार्थियों को दीर्घकालिक लाभ मिल सके।
पठानिया ने कहा कि यह पूर्णतः रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रम है, जिसमें विद्यार्थियों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाता है। इसी कारण पाठ्यक्रम पूर्ण करते ही अनेक विद्यार्थियों को प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य के अवसर प्राप्त हो रहे हैं। आतिथ्य एवं पर्यटन क्षेत्र से जुड़े विद्यार्थी देश-विदेश के प्रसिद्ध समूहों जैसे ताज होटल्स, द ओबेरॉय ग्रुप, ह्यात्त, लेमन ट्री होटल्स, आईटीसी होटल्स तथा मैरियट इंटरनेशनल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वहीं खुदरा व्यापार क्षेत्र के विद्यार्थी टॉमी हिलफिगर, टाटा ग्रुप और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसे प्रतिष्ठित औद्योगिक समूहों में कार्यरत हैं।उन्होंने यह भी मांग रखी कि इस पाठ्यक्रम से जुड़े प्रशिक्षकों के लिए स्थायी नीति बनाई जाए। उनका कहना था कि जब तक शिक्षकों को स्थायित्व और सेवा सुरक्षा नहीं मिलेगी, तब तक इस योजना को और अधिक प्रभावी बनाना कठिन होगा। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि सरकार युवाओं के हित में सकारात्मक निर्णय लेगी।
इस विषय पर शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने भी सदन में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राज्य सरकार कौशल आधारित शिक्षा को रोजगार से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि इस योजना की शुरुआत 12 महाविद्यालयों में की गई थी, जिसे अब बढ़ाकर 20 महाविद्यालयों तक विस्तारित कर दिया गया है। पिछले दो वर्षों से इसका संपूर्ण व्यय राज्य सरकार द्वारा वहन किया जा रहा है।
व्यावसायिक स्नातक पाठ्यक्रम से जुड़े पदाधिकारियों और प्रशिक्षकों ने सरकार के इस सकारात्मक रुख का स्वागत करते हुए आभार व्यक्त किया। उनका मानना है कि यदि इसे शीघ्र ही शिक्षा की मुख्यधारा में शामिल किया जाता है, तो विशेष रूप से ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुख शिक्षा का स्थायी और सशक्त विकल्प प्राप्त होगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान समय में पारंपरिक शिक्षा के साथ कौशल आधारित प्रशिक्षण की आवश्यकता अत्यधिक बढ़ गई है। ऐसे में इस पाठ्यक्रम को मुख्यधारा में स्थान देना प्रदेश के युवाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो सकता है।