धर्मशाला, राहुल -:धर्मशाला स्थित राजकीय बॉयज सीनियर सेकेंडरी स्कूल, जो इस वर्ष अपना 100वां वर्ष पूरा कर रहा है, को मर्ज करने के सरकारी निर्णय ने स्कूल स्टाफ, छात्रों और अभिभावकों में असमंजस और चिंता पैदा कर दी है। स्कूल प्रशासन को प्राप्त दो अलग-अलग पत्रों ने स्थिति और जटिल बना दी है।
स्कूल का ऐतिहासिक महत्व
1926 में स्थापित यह बॉयज स्कूल न केवल धर्मशाला बल्कि पूरे कांगड़ा जिले के लिए शैक्षणिक उत्कृष्टता का केंद्र रहा है। इस स्कूल से कई प्रतिभाएँ प्रदेश स्तर पर उभरी हैं और वर्तमान में भी आसपास के क्षेत्रों से छात्र शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इस ऐतिहासिक पहचान के चलते अभिभावक और स्थानीय समाज स्कूल के मर्ज होने के निर्णय के विरोध में हैं।
प्रशासन और अभिभावकों की असहमति
स्कूल प्रशासन का कहना है कि बॉयज स्कूल में सभी प्रकार की सुविधाओं के साथ पर्याप्त भूमि उपलब्ध है। प्रिंसिपल यशपाल मनकोटिया ने बताया कि स्कूल के पास लगभग 70 कनाल भूमि है और यदि इसे लीड स्कूल बनाया जाए, तो निर्माण और विकास की सभी जरूरतें पूरी की जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि स्कूल को सत्र के अंत में मर्ज करने की बजाय सत्र की शुरुआत में ही सरकार को इस तरह की प्रक्रिया अपनानी चाहिए थी।
यशपाल मनकोटिया, प्रिंसिपल, राजकीय बॉयज सीनियर सेकेंडरी स्कूल धर्मशाला
“यह स्कूल 1926 से चल रहा है और इस वर्ष 100वीं वर्षगांठ मना रहा है। बॉयज स्कूल में सभी सुविधाएँ उपलब्ध हैं। हमें उम्मीद है कि सरकार इसे को-एजुकेशनल मॉडल के तहत जारी रखेगी और गल्र्स स्कूल को सीबीएसई करने पर विचार करेगी। हाल ही में हमें डे-बॉर्डिंग स्कूल के लिए 1.98 करोड़ रुपये स्वीकृति का पत्र भी मिला है। दोनों पत्रों में विरोधाभास है, जिसे सरकार ही स्पष्ट कर सकती है।”
वहीं अभिभावक इस निर्णय के खिलाफ हैं और उनका कहना है कि 100 वर्षीय बॉयज स्कूल को किसी अन्य स्कूल में मर्ज करना अनुचित है। अभिभावक चाहते हैं कि आसपास के छोटे स्कूलों को
बॉयज स्कूल में मर्ज किया जाए।
रवि राणा, अभिभावक
“सौ साल का स्कूल अपने आप में एक हेरिटेज बन चुका है। हम नहीं चाहते कि हमारे बच्चे हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड छोड़कर सीबीएसई में जाएं। सरकार को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए।”
सुविधाओं और पढ़ाई पर प्रभाव
अभिभावक निशा देवी और सलोचना देवी ने भी स्कूल मर्जिंग पर चिंता जताई। निशा देवी ने कहा कि स्कूल में बच्चों के लिए सभी आवश्यक सुविधाएँ मौजूद हैं और यहाँ चंबा सहित अन्य स्थानों के बच्चे भी पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि यदि स्कूल को सीबीएसई में बदल दिया गया, तो अभिभावकों के खर्च बढ़ जाएंगे और बच्चों की पढ़ाई पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।
निशा देवी, अभिभावक
“सौ वर्षों से चला आ रहा यह स्कूल अपनी जगह में महत्वपूर्ण है। सरकार को स्कूल की कमियों को सुधारने की दिशा में काम करना चाहिए, न कि इसे बंद कर देना चाहिए।”
सलोचना देवी ने कहा कि स्कूल में एनसीसी, एनएसएस जैसी गतिविधियाँ और विशेष बच्चों के लिए सुविधाएँ भी उपलब्ध हैं। इस तरह की सेवाओं को मर्जिंग के चलते खतरा हो सकता है।“यह स्कूल न केवल ऐतिहासिक है बल्कि सभी सुविधाओं से लैस है। सरकार को इसे बंद नहीं करना चाहिए। सौ वर्ष का यह सफर बच्चों और अभिभावकों के लिए गर्व का विषय है।
प्रशासन की अपील
प्रिंसिपल यशपाल मनकोटिया ने अभिभावकों और अधिकारियों से अपील की कि स्कूल को मर्ज करने से पहले सभी विकल्पों पर विचार किया जाए और ऐतिहासिक और शैक्षणिक महत्व को ध्यान में रखा जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा और छात्रों की सुरक्षा प्राथमिकता होनी चाहिए, और मर्जिंग का निर्णय केवल सरकारी पत्रों के आधार पर लिया जाना उचित नहीं है।
निष्कर्ष
धर्मशाला का यह बॉयज स्कूल सौ वर्षों से शिक्षा का केंद्र रहा है। अभिभावकों और स्थानीय समाज का कहना है कि इसे मर्ज करने का निर्णय तुरंत प्रभाव से लागू करने की बजाय व्यापक चर्चा और पुनर्विचार के बाद ही लिया जाना चाहिए। सौ वर्ष का यह स्कूल न केवल ऐतिहासिक विरासत है बल्कि छात्रों के भविष्य और शिक्षा की गुणवत्ता का प्रतीक भी है।