वॉशिंगटन |अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ को अवैध ठहराए जाने का भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच हुआ मौजूदा समझौता अमेरिका के हित में है और इसमें कोई बदलाव नहीं होगा।
ट्रंप ने कहा, “भारत टैरिफ देगा और अमेरिका नहीं देगा। यही समझौता है। यह पहले जैसा नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक मजबूत और समझदार नेता हैं, लेकिन व्यापारिक समझौतों में भारत पहले अमेरिका के लिए लाभकारी स्थिति में था। अब हमने संतुलन स्थापित किया है।” उन्होंने मौजूदा समझौते को “फेयर डील” बताते हुए कहा कि इससे अमेरिकी उद्योगों को फायदा होगा।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
शुक्रवार को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए व्यापक वैश्विक टैरिफ को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि राष्ट्रपति ने आपातकालीन शक्तियों का दुरुपयोग करते हुए इन टैरिफ को लागू किया था। इस फैसले को ट्रंप की व्यापार नीति के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि टैरिफ उनकी आर्थिक रणनीति का प्रमुख हिस्सा रहे हैं।
ट्रंप का पलटवार: 10% ग्लोबल टैरिफ
सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद ट्रंप ने घोषणा की कि वह एक वैकल्पिक कानूनी प्रावधान के तहत सभी देशों पर 10 प्रतिशत का समान वैश्विक टैरिफ लागू करेंगे। उनके अनुसार, संबंधित कानून 150 दिनों तक ऐसे टैरिफ लागू करने की अनुमति देता है।
ट्रंप ने कहा कि वह अपने व्यापार एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए अन्य कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल करेंगे और उनकी योजनाएं किसी भी फैसले से प्रभावित नहीं होंगी।
सुप्रीम कोर्ट पर नाराजगी
राष्ट्रपति ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर असंतोष जताते हुए कहा कि वह इस निर्णय से “निराश” हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके पास आगे बढ़ने के लिए “मजबूत और प्रभावी विकल्प” मौजूद हैं।
अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत अब यह देख रहा है कि नए टैरिफ कदमों का वैश्विक बाजार और भारत-अमेरिका संबंधों पर क्या प्रभाव पड़ता है।