मंडी,धर्मवीर – मंडी शहर निवासी पारूल अरोड़ा टांकरी लिपि के संरक्षण और इसके प्रचार-प्रसार के लिए लगातार प्रयासरत हैं। मंडी में जारी शिवरात्रि मेले के दौरान भी उन्होंने इस लिपि के प्रचार-प्रसार के लिए एक अनूठी पहल की। उन्होंने नगर निगम के सहयोग से शहर में एक स्टॉल लगाकर टांकरी लिपि के पुराने अभिलेखों को प्रदर्शित किया, जिन्हें देखने की उत्सुकता में सैंकड़ों लोग यहां आए और विलुप्त हो चुकी टांकरी लिपि के बारे में जाना।
पारूल ने बताया कि उनके पास 300 वर्ष पुराने टांकरी लिपि में लिखे रामायण की कुछ प्रतियां मौजूद हैं। इसके अलावा शिव कवच, राजा शमशेर सेन के समय की कुंडली, पुराने बही खाते, चंबा रियासत के पुराने राजस्व दस्तावेज, 1949 में राजा द्वारा भेजे गए पोस्टकार्ड, उस दौरान किए जाने वाले हस्ताक्षरों की कुछ प्रतियां और कुछ चित्र मौजूद हैं, जिन्हें प्रदर्शित् किया गया है। यह सभी दस्तावेज टांकरी लिपि में ही लिखे गए हैं। पारूल ने कहा कि इससे पता चलता है कि टांकरी लिपि एक समय में हमारी प्राचीन संस्कृति का कितना अहम हिस्सा थी। लेकिन अब यह विलुप्त हो चुकी है। लोगों तक इसकी जानकारी पहुंच सके, इसलिए मेले में यह स्टॉल लगाकर इसका प्रचार-प्रसार करने का प्रयास किया गया है।
वहीं, लोगों ने इसे पारूल अरोड़ा की एक सराहनीय पहल बताया। स्थानीय निवासी दुनी चंद और डा. अभिनव सोनी ने कहा कि हमारे पुर्वज इस टांकरी लिपि में ही लेख लिखते थे, लेकिन अब यह सभी चीजें इतिहास बन चुकी हैं। इन्होंने प्रदेश सरकार से मांग उठाई है कि सरकार इसके संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए ठोस कदम उठाए, ताकि विलुप्त हो चुकी इस लिपि के प्रति लोगों में फिर से जागृति आ सके।