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NCERT की किताब में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ विषय पर विवाद गहराया

नई दिल्ली |  आठवीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ विषय को शामिल किए जाने को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस निर्णय की जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के अनुसार, पाठ्यपुस्तक के निर्माण, समीक्षा और अंतिम स्वीकृति की प्रक्रिया में कुल 57 विषय विशेषज्ञों और शिक्षाविदों की भागीदारी रही थी।

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत इस पुस्तक को तैयार करने के लिए तीन अलग-अलग समितियों का गठन किया गया था। पहली थी 15 सदस्यीय पाठ्यक्रम निर्माण समिति, जिसके अध्यक्ष आईआईटी गांधीनगर के गेस्ट प्रोफेसर मिशेल डैनिनो और संजीव सान्याल थे। इस समिति की जिम्मेदारी पाठ्यवस्तु का प्रारूप तैयार करना और विषयों का चयन करना था।

इसके अतिरिक्त 23 सदस्यीय समीक्षक समिति बनाई गई थी, जिसका कार्य पाठ्यक्रम निर्माण समिति के कार्यों की समीक्षा करना था। अंतिम चरण में 19 सदस्यीय राष्ट्रीय पाठ्यक्रम एवं शिक्षण-अधिगम सामग्री समिति ने पाठ्यपुस्तक की सामग्री को अंतिम रूप दिया। इस तरह तीनों समितियों में कुल 57 सदस्य शामिल रहे।

शिक्षा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि इतनी व्यापक और बहुस्तरीय प्रक्रिया का उद्देश्य यही होता है कि किसी भी स्तर पर तथ्यात्मक या विषयगत त्रुटि न रह जाए। हालांकि, इस मामले में प्रारंभिक तौर पर लापरवाही की आशंका जताई जा रही है। आलोचकों का तर्क है कि विवादित विषयवस्तु को पर्याप्त विमर्श के बिना शामिल किया गया और विभिन्न स्तरों पर उसकी समीक्षा प्रभावी ढंग से नहीं हो पाई।

सूत्रों के अनुसार, एनसीईआरटी एक स्वायत्त संस्था है और पाठ्यवस्तु निर्धारण में उसे पर्याप्त स्वतंत्रता प्राप्त है। सामान्यतः शिक्षा मंत्रालय का पाठ्यक्रम में सीधा हस्तक्षेप नहीं होता, हालांकि आवश्यकता पड़ने पर औपचारिक परामर्श की प्रक्रिया अपनाई जाती है।

एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तक तैयार करने की प्रक्रिया बहु-चरणीय होती है। पहले चरण में कक्षा-स्तर के अनुसार शिक्षण फ्रेमवर्क तैयार किया जाता है। इसके बाद विषय विशेषज्ञों की समितियां शोध, तथ्य और शैक्षणिक आवश्यकताओं के आधार पर सामग्री का चयन और मसौदा तैयार करती हैं। प्रत्येक विषय को शामिल करने से पहले उस पर चर्चा और समीक्षा की जाती है, जिसके बाद अंतिम स्वीकृति दी जाती है।

विवाद के बीच अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित संस्थान इस मुद्दे पर क्या आधिकारिक रुख अपनाता है और आगे की प्रक्रिया किस दिशा में जाती है।

Karuna

infosummerexpress@gmail.com

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