चंडीगढ़। हरियाणा के सरकारी विभागों की आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में जमा राशि से जुड़े करीब 590 करोड़ रुपये के कथित बैंक घोटाले की जांच तेज हो गई है। हरियाणा एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने इस मामले में सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज कर ली है। जांच के तहत बैंक मैनेजर रिभव, ‘स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड’ की निदेशक स्वाति सिंगला, अभिषेक सिंगला और उनके सहयोगी अभय कुमार से करीब साढ़े चार घंटे तक पूछताछ की गई। इस दौरान एसीबी ने उनके लैपटॉप समेत कई डिजिटल उपकरण भी अपने कब्जे में ले लिए।
पूछताछ के दौरान आरोपियों की निशानदेही पर एसीबी को कुछ अहम दस्तावेज और जानकारियां मिली हैं। हालांकि जांच एजेंसी का कहना है कि आरोपी पूछताछ में पूरा सहयोग नहीं कर रहे हैं। इसी के चलते एसीबी की अलग-अलग टीमें मोहाली, गुरुग्राम, चंडीगढ़ समेत कई संदिग्ध ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही हैं।
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों के बयान एक-दूसरे से मेल नहीं खा रहे हैं। विशेष रूप से रिभव और अभय के बयान स्वाति और अभिषेक के बयान से अलग पाए गए हैं। एसीबी ने रिभव से यह भी पूछा कि सरकारी विभागों के कौन-कौन से कर्मचारी इस मामले में शामिल हैं और किस प्रकार बिना वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) के सरकारी धन का ट्रांसफर किया गया। रिभव ने अपने जवाब में कहा कि सभी भुगतान बैंक की निर्धारित प्रक्रिया और ओटीपी सत्यापन के बाद ही किए गए।
स्वाति और अभिषेक का कहना है कि उन्होंने सरकारी विभागों और बैंकों को कानूनी सहायता देने के उद्देश्य से फर्म बनाई थी और इसके बदले फीस ली जाती थी। हालांकि जांच में सामने आया है कि करीब 300 करोड़ रुपये की सरकारी राशि ‘स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट’ के खातों में ट्रांसफर की गई, जिससे उनकी भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
एसीबी की जांच में यह भी पता चला है कि इस धोखाधड़ी के तार ज्वेलर्स, प्रॉपर्टी डीलर्स, बिल्डर्स और अन्य कारोबारियों से भी जुड़े हुए हैं। इन लोगों के खातों का इस्तेमाल सरकारी धन की हेराफेरी के लिए किया गया। आरोपियों का नेटवर्क पंचकूला, चंडीगढ़, मोहाली से लेकर गुरुग्राम और दिल्ली तक फैला हुआ बताया जा रहा है। मामले की गहन जांच के लिए एसीबी ने गुरुग्राम, हिसार, करनाल और रोहतक की टीमों को भी जांच में लगाया है।
इस मामले में 23 फरवरी को पंचकूला में भारतीय न्याय संहिता 2023 की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया था। इसमें आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के कुछ अज्ञात अधिकारियों के अलावा कई सरकारी कर्मचारियों को भी आरोपी बनाया गया है।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना-2.0 के तहत मिलने वाली 50 करोड़ और 25 करोड़ रुपये की राशि सक्षम अधिकारियों की अनुमति के बिना ही निजी बैंकों में जमा कर दी गई थी। बाद में विभाग ने इन खातों को बंद कर राशि एक्सिस बैंक में ट्रांसफर करने के निर्देश दिए, लेकिन बैंकों की ओर से इसमें देरी की गई। जांच के अनुसार आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने 50 करोड़ रुपये की जगह केवल 1.27 करोड़ रुपये ही वापस लौटाए।
एसीबी को संदेह है कि बैंक अधिकारियों और कुछ सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत से रिकॉर्ड में हेरफेर कर सरकारी धन का गबन किया गया। फिलहाल मामले की जांच डीएसपी शुकपाल सिंह के नेतृत्व में जारी है और मनी ट्रेल सहित सभी वित्तीय लेन-देन की गहन पड़ताल की जा रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।