चंडीगढ़। कोसली बाईपास के निर्माण में हो रही देरी का मामला विधानसभा में जोरदार तरीके से उठाया गया। विधायक अनिल यादव ने कहा कि बाईपास न बनने के कारण कोसली स्टेशन के पास बने आरओबी और मुख्य सड़कों पर यातायात का दबाव लगातार बढ़ रहा है, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
विधायक ने बताया कि हरियाणा सरकार ने करीब 11 वर्ष पहले कोसली कस्बे में बाईपास निर्माण की घोषणा की थी, लेकिन अब तक यह परियोजना सिरे नहीं चढ़ सकी। पिछले दो वर्षों से भूमि खरीद का प्रस्ताव सरकार की उच्च स्तरीय खरीद समिति के पास लंबित है। इस देरी के चलते कोसली स्टेशन के निकट आरओबी पर ट्रैफिक जाम की स्थिति आम हो गई है।
उन्होंने कहा कि महेंद्रगढ़-नारनौल क्षेत्र से झज्जर, दिल्ली और बहादुरगढ़ की ओर जाने वाली बजरी और क्रशर से लदी भारी गाड़ियां भी कोसली आरओबी से होकर गुजरती हैं। इससे वाहनों की संख्या बढ़ती जा रही है और रोजाना जाम की समस्या बनी रहती है। विधायक ने सरकार से मांग की कि बाईपास का निर्माण कार्य जल्द शुरू कराया जाए।
लोक निर्माण मंत्री रणबीर सिंह गंगवा के जवाब के बाद विधायक ने मुआवजे के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने बताया कि हाई लेवल परचेज कमेटी ने भूमि का मुआवजा 60 लाख रुपये प्रति एकड़ तय किया है, जबकि धनिया गांव में सर्किल रेट 39.70 लाख रुपये और सादत नगर में 47.88 लाख रुपये प्रति एकड़ है। किसानों की मांग है कि ई-भूमि पोर्टल पर जमीन का मूल्य 60 लाख रुपये प्रति एकड़ से अधिक निर्धारित किया जाए, तभी वे भूमि देने पर सहमत होंगे।
फिलहाल इस परियोजना के लिए 23.9 एकड़ भूमि की आवश्यकता है। लोक निर्माण मंत्री ने कहा कि विधायक एक बार भू-स्वामियों से बातचीत कर सहमति बनाने का प्रयास करें। इसके बाद मामला मुख्यमंत्री के समक्ष रखा जाएगा और कोसली बाईपास योजना को आगे बढ़ाने पर विचार किया जाएगा।