धर्मशाला, राहुल-: हिमाचल प्रदेश शिक्षक संघ (एचजीटीयू) की राज्य स्तरीय बैठक हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड कार्यालय, धर्मशाला में आयोजित हुई। बैठक में प्रदेशभर से आए पदाधिकारियों ने शिक्षकों से जुड़े शैक्षणिक, परीक्षात्मक और प्रशासनिक विषयों पर विस्तृत चर्चा करते हुए बोर्ड को 35 बिंदुओं का सुझाव पत्र सौंपा। मुख्य फोकस परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, मूल्यांकन प्रक्रिया में सुधार और शिक्षकों के लंबित मामलों के समाधान पर रहा।
संघ ने बोर्ड परीक्षाओं को अधिक वैज्ञानिक और न्यायसंगत बनाने की मांग उठाई। कक्षा 10वीं गणित विषय को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की तर्ज पर ‘बेसिक’ और ‘स्टैंडर्ड’ स्तर में विभाजित करने का प्रस्ताव प्रमुखता से रखा गया, ताकि विद्यार्थियों को उनकी भविष्य की शैक्षणिक आवश्यकताओं के अनुरूप विकल्प मिल सकें। इसके साथ ही 10+2 गणित विषय की उत्तर पुस्तिकाओं के पृष्ठ बढ़ाने या अतिरिक्त उत्तर-पुस्तिकाएं उपलब्ध कराने, मूल्यांकन केंद्रों पर चरणबद्ध अंकन प्रणाली लागू करने और व्यावहारिक परीक्षाएं बाह्य परीक्षकों से कराने की मांग भी की गई।
बैठक में पुनर्मूल्यांकन परिणाम समयबद्ध घोषित करने, एसओएस परीक्षाओं की अंकतालिकाएं शीघ्र उपलब्ध कराने तथा स्पॉट मूल्यांकन केंद्र जी(ब) वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय धर्मशाला को पुनः बहाल करने का मुद्दा भी जोर-शोर से उठा। संघ ने बोर्ड कार्यों में लगे शिक्षकों के मानदेय और यात्रा भत्ते का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने की आवश्यकता दोहराई। सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था लागू होने के बाद अनावश्यक ऑब्जर्वर प्रणाली समाप्त करने की मांग भी रखी गई।संघ पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि परीक्षा प्रणाली में किसी भी प्रकार का परिवर्तन सत्र प्रारंभ होने से पहले घोषित किया जाना चाहिए, ताकि शिक्षक और विद्यार्थी समुचित तैयारी कर सकें। एसएमसी शिक्षकों को भी परीक्षा ड्यूटी में समान अवसर देने की बात कही गई।बैठक के दौरान बोर्ड के नवनियुक्त चेयरमैन की अनुपस्थिति पर नाराजगी भी जताई गई। प्रदेशाध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने कहा कि पूर्व निर्धारित समय के बावजूद चेयरमैन का उपस्थित न होना शिक्षकों के मुद्दों के प्रति गंभीरता की कमी को दर्शाता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में शीर्ष स्तर पर संवाद की प्रक्रिया अधिक सुदृढ़ की जाएगी।संघ ने भरोसा दिलाया कि यदि सुझावों पर सकारात्मक पहल होती है तो प्रदेश की परीक्षा व्यवस्था अधिक पारदर्शी, प्रभावी और छात्रहितैषी बन सकेगी।