चंडीगढ़। हरियाणा के विभिन्न विभागों, बोर्डों, निगमों, नगर निगमों और विश्वविद्यालयों में कार्यरत मिनिस्ट्रीयल कर्मचारियों ने एक बार फिर 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों को पूरी तरह लागू करने की मांग तेज कर दी है। हरियाणा मिनिस्ट्रीयल स्टाफ एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द उनकी मांगों पर फैसला नहीं लिया तो राज्यव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा।
संगठन के प्रदेशाध्यक्ष हितेंद्र सिहाग, महासचिव जगमिंदर सिंह और महिला सब कमेटी संयोजक मुकेश खरब ने संयुक्त बयान में कहा कि वर्ष 2014 के भाजपा के चुनावी संकल्प पत्र और 25 अगस्त 2014 को हरियाणा कैबिनेट के फैसले के अनुसार मिनिस्ट्रीयल कर्मचारियों के वेतनमान तय किए जाने चाहिए।
उन्होंने बताया कि प्रस्तावित वेतनमान के अनुसार लिपिक का मूल वेतन 35,400 रुपये, सीनियर डाटा एंट्री ऑपरेटर का 39,900 रुपये, सहायक और स्टेनोग्राफर का 44,900 रुपये, उपाधीक्षक का 47,600 रुपये तथा अधीक्षक का वेतन 56,100 रुपये निर्धारित किया जाना चाहिए।
कर्मचारी नेताओं का आरोप है कि पिछले करीब 12 वर्षों से मिनिस्ट्रीयल कर्मचारियों को उनके वैधानिक अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है। उनका कहना है कि इस दौरान विधायकों और जनप्रतिनिधियों के वेतन और भत्तों में कई बार वृद्धि की गई, लेकिन कर्मचारियों की मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। बढ़ती महंगाई के कारण कर्मचारियों के लिए परिवार का खर्च चलाना मुश्किल होता जा रहा है।
संगठन ने कहा कि सरकार ने 7वें वेतन आयोग की कुछ सिफारिशें आंशिक रूप से लागू की हैं, जैसे महंगाई भत्ता (डीए) बढ़ाना, लेकिन मिनिस्ट्रीयल स्टाफ के मूल वेतनमान से जुड़ी मांग अभी भी लंबित है।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि क्लर्क एसोसिएशन और मिनिस्ट्रीयल स्टाफ पहले भी इस मांग को लेकर कई बार प्रदर्शन और हड़ताल कर चुके हैं। कर्मचारियों की मुख्य मांग क्लर्क के मूल वेतन को 19,900 रुपये से बढ़ाकर 35,400 रुपये करने की है, जिसे वे 7वें केंद्रीय वेतन आयोग के पे मैट्रिक्स लेवल-6 के अनुरूप बताते हैं।
एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि 2014 के कैबिनेट निर्णय को जल्द लागू किया जाए, ताकि कर्मचारियों को उनका अधिकार मिल सके। साथ ही चेतावनी दी गई है कि मांगें पूरी न होने पर राज्यभर में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।