गोहाना (सोनीपत)। किसानों को वर्षा पर निर्भर रहे बिना पर्याप्त सिंचाई पानी उपलब्ध कराने के लिए सिंचाई विभाग ने नई नाला में 54 लाख घन फीट क्षमता वाला स्टोरेज टैंक तैयार किया है। यह प्रदेश का पहला पायलट प्रोजेक्ट है, जिसमें अतिरिक्त वर्षा जल को सीधे ड्रेन में संग्रहित किया जाएगा। इस वर्ष वर्षा के मौसम में पहली बार पानी का भंडारण किया जाएगा, जिससे किसानों को दोहरा लाभ होगा। अधिक वर्षा होने पर पानी ड्रेन में छोड़ा जा सकेगा और सूखे मौसम में इसी संग्रहित जल से सिंचाई संभव होगी। इस परियोजना पर लगभग 10 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
नई नाला में गांव छतैहरा से महमूदपुर तक लगभग 14,000 फीट लंबाई में टैंक बनाया गया है। टैंक की गहराई 15 फीट तक है और जिस हिस्से में टैंक बनाया गया, वहां ड्रेन को चार से छह फीट तक और गहरा किया गया। दोनों किनारों के रैंप कंक्रीट से मजबूत किए गए हैं, जबकि नीचे का हिस्सा कच्चा छोड़ा गया है ताकि भूजल स्तर भी बढ़ सके। पानी रोकने और संग्रहण के लिए ड्रेन में दो स्थानों पर छोटे बांध बनाए गए हैं। अधिक वर्षा होने या नहरों और डिस्ट्रीब्यूट्रियों से छोड़े जाने वाले अतिरिक्त पानी का भंडारण इसी टैंक में किया जाएगा। वर्षा समाप्त होने के बाद, यह पानी आसपास के किसानों के लिए सिंचाई में इस्तेमाल किया जाएगा।
इस परियोजना से छतैहरा, अहमदपुर माजरा, मातंड, महमूदपुर, सिवानका, जागसी और खंदराई के लगभग 5,000 एकड़ कृषि भूमि के किसानों को लाभ मिलेगा। सिंचाई विभाग ने पहले चरण में ड्रेन में स्टोरेज टैंक तैयार किया है। दूसरे चरण में सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली पर काम किया जाएगा, जिसके तहत ड्रेन से पाइपलाइन बिछाकर किसानों को सीधे पानी उपलब्ध कराया जाएगा। इस योजना के सफल होने पर प्रदेश की अन्य ड्रेनों में भी इसी तरह के स्टोरेज टैंक विकसित किए जा सकते हैं।
यह पहल न केवल जल संरक्षण में मदद करेगी, बल्कि गिरते भूजल स्तर को सुधारने में भी सहायक साबित होगी। परियोजना का काम दिसंबर 2024 में शुरू हुआ था और अब इसे पूरा कर लिया गया है। अक्षय कुमार, एसडीओ, सिंचाई विभाग ने बताया कि यह वर्षा जल भंडारण मॉडल किसानों के लिए बड़ी राहत साबित होगा और भविष्य में इसे अन्य क्षेत्रों में भी लागू किया जा सकता है।