शिमला, 3 मार्च -: हिमाचल प्रदेश में रेल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की गई है। ऊना जिले की दौलतपुर–कटरोली रेललाइन पर उत्तर भारत का सबसे लंबा रेल वायडक्ट तैयार किया गया है, वहीं भानुपल्ली–बेरी रेललाइन परियोजना में एकल सुरंग ब्रेकथ्रू का कार्य सफलतापूर्वक पूरा हुआ है। इन दोनों परियोजनाओं को क्षेत्रीय विकास और बेहतर कनेक्टिविटी की दृष्टि से अहम माना जा रहा है।
दौलतपुर–कटरोली रेललाइन पर 7.80 किलोमीटर लंबा वायडक्ट और 10.55 किलोमीटर नई ब्रॉडगेज लाइन का निर्माण लगभग 677 करोड़ रुपये की लागत से पूरा हुआ है। अधिकारियों के अनुसार यह वायडक्ट इंजीनियरिंग की दृष्टि से अत्यंत चुनौतीपूर्ण भूभाग पर बनाया गया है। परियोजना में 301 स्पैन और 302 पियर का निर्माण किया गया है, जिसमें अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया गया। निर्माण कार्य में लगभग 16,000 मीट्रिक टन संरचनात्मक स्टील और 19,000 मीट्रिक टन टीएमटी स्टील का इस्तेमाल हुआ है।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इस परियोजना से ऊना और आसपास के क्षेत्रों में यातायात सुविधा बेहतर होगी, जिससे व्यापार, पर्यटन और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिलेगा। लंबे समय से बेहतर रेल संपर्क की मांग कर रहे स्थानीय निवासियों के लिए यह परियोजना राहत लेकर आई है। विशेषज्ञों के अनुसार, बेहतर कनेक्टिविटी से औद्योगिक गतिविधियों में भी तेजी आने की संभावना है।इसी क्रम में भानुपल्ली–बेरी रेललाइन परियोजना के तहत लगभग 8 किलोमीटर लंबी प्रस्तावित सुरंग में से 750 मीटर हिस्से का सफल ब्रेकथ्रू किया गया है। यह उपलब्धि तकनीकी रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि पहाड़ी भूगोल में सुरंग निर्माण चुनौतीपूर्ण होता है। परियोजना पूरी होने के बाद हिमाचल प्रदेश का राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जुड़ाव और मजबूत होगा।
परिवहन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूर्ण होने पर प्रदेश में पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिलेगी। साथ ही कृषि और छोटे उद्योगों को भी बाहरी बाजारों तक बेहतर पहुंच प्राप्त होगी। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद है।राज्य और केंद्र स्तर पर अधिकारियों ने कहा है कि परियोजनाओं के शेष कार्य को भी निर्धारित समयसीमा में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। निर्माण कार्य की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
हिमाचल प्रदेश में रेल नेटवर्क का विस्तार लंबे समय से विकास की प्राथमिकताओं में शामिल रहा है। इन परियोजनाओं को उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो भविष्य में प्रदेश के समग्र सामाजिक और आर्थिक विकास को नई ऊंचाई देने में सहायक सिद्ध हो सकता है।