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लंबे ड्राईस्पेल से बढ़ा वनाग्नि का खतरा, धर्मशाला वन मंडल की 50 बीट अति संवेदनशील

धर्मशाला, राहुल-:सर्दियों में पर्याप्त बारिश न होने और लंबे ड्राईस्पेल के चलते जिला कांगड़ा के धर्मशाला वन मंडल में जंगलों में आग लगने का खतरा बढ़ गया है। स्थिति को देखते हुए वन विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है और फायर सीजन को लेकर समय से पहले ही तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। विभाग ने 15 मार्च से 15 जून तक स्टाफ की छुट्टियां रद्द करने का निर्णय लिया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

धर्मशाला वन मंडल के तहत आने वाली करीब 70 वन बीटों में से 50 बीट को फॉरेस्ट फायर की दृष्टि से अति संवेदनशील माना गया है। यही कारण है कि विभाग इन क्षेत्रों में विशेष निगरानी रख रहा है। मंडल के अंतर्गत कुल 61 हजार हेक्टेयर वन क्षेत्र आता है, जिसमें से लगभग 40 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में चीड़ के पेड़ हैं। चीड़ के जंगलों में सूखी पत्तियों और रेजिन के कारण आग बहुत तेजी से फैलने की संभावना रहती है, जिससे खतरा और बढ़ जाता है।आम तौर पर फॉरेस्ट फायर सीजन 15 अप्रैल से शुरू होता है, लेकिन इस बार बारिश कम होने और सूखे की स्थिति के कारण विभाग ने तैयारियां पहले ही शुरू कर दी हैं। विभागीय अधिकारियों के अनुसार पिछले कुछ दिनों में धर्मशाला वन मंडल के अंतर्गत जंगलों में आग लगने के इक्का-दुक्का मामले भी सामने आ चुके हैं, जिसके चलते सतर्कता और बढ़ा दी गई है।

डीएफओ धर्मशाला अमित शर्मा ने बताया कि इस बार सर्दियों में केवल एक बार ही बारिश हो पाई है। लंबे समय से सूखा रहने के कारण वन क्षेत्र फायर सीजन के लिहाज से काफी संवेदनशील हो गए हैं। उन्होंने बताया कि वनों में खरसू ओक, खैर और चीड़ जैसे पेड़ बड़ी संख्या में मौजूद हैं और मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए आग लगने का खतरा बना हुआ है। इसी को ध्यान में रखते हुए फायर सीजन से करीब 15 दिन पहले ही आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं।उन्होंने बताया कि वनाग्नि से निपटने के लिए रेंज स्तर पर पांच-पांच टीमों का गठन किया गया है, जो संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखेंगी। वहीं डिवीजन स्तर पर एसीएफ की अध्यक्षता में कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है, जहां से पूरे क्षेत्र की स्थिति पर नजर रखी जाएगी और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।

अमित शर्मा ने बताया कि धर्मशाला वन मंडल के अंतर्गत कुल 72 वन बीट हैं, जिनमें से करीब 70 प्रतिशत यानी 50 बीट को अति संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है। ऐसे में विभाग ने स्थानीय लोगों से भी सहयोग की अपील की है। उन्होंने कहा कि यदि कहीं भी जंगल में आग लगने की घटना दिखाई दे तो इसकी सूचना तुरंत वन विभाग को दें और आग बुझाने में फील्ड स्टाफ का सहयोग करें, ताकि समय रहते बड़े नुकसान को रोका जा सके।

Chandrika

chandrika@summerexpress.in

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