नई दिल्ली | मध्य-पूर्व में जारी सैन्य संघर्ष के बीच ईरान ने खाड़ी देशों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि वे ईरानी मिसाइलों के खतरे से बचना चाहते हैं तो उन्हें अपने यहां मौजूद अमेरिकी सैनिकों और सैन्य अड्डों को हटाना होगा।
तेहरान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार ईरान की संसद के एक सदस्य ने बयान दिया कि संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कुवैत, ओमान, कतर, बहरीन और तुर्की जैसे देशों को अपने क्षेत्रों से अमेरिकी सेना को बाहर करना चाहिए। उनका कहना है कि जब तक इन देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद रहेंगे, तब तक वे संभावित हमलों के दायरे में रहेंगे।
युद्ध का छठा दिन, हमले जारी
अमेरिका और इजरायल द्वारा 28 फरवरी को शुरू किए गए सैन्य अभियान के बाद यह संघर्ष अब छठे दिन में प्रवेश कर चुका है। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच लगातार मिसाइल और हवाई हमले हो रहे हैं।
ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल के प्रमुख शहर तेल अवीव सहित कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। इसके अलावा खाड़ी क्षेत्र में स्थित कुछ अमेरिकी सैन्य अड्डों पर भी हमलों की खबरें सामने आई हैं।
बढ़ता जा रहा है युद्ध का असर
ईरान की संस्था “फाउंडेशन ऑफ मार्टियर्स एंड वेटरंस अफेयर्स” के अनुसार इस संघर्ष में अब तक करीब 1,230 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं इजरायल ने भी नए हमलों की चेतावनी देते हुए कहा है कि उसने लेबनान में हिजबुल्लाह से जुड़े ठिकानों पर कार्रवाई की है।
ईरान का अमेरिका पर बड़ा आरोप
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में श्रीलंका के पास ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस डेना पर हमला किया। उनके मुताबिक इस हमले में 80 से अधिक लोगों की मौत हुई है। उन्होंने इसे समुद्र में किया गया गंभीर अत्याचार बताया।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर चेतावनी
इस बीच ईरान की सैन्य इकाई आईआरजीसी ने दावा किया है कि उसने खाड़ी क्षेत्र में एक अमेरिकी तेल टैंकर को निशाना बनाया, जिससे उसमें आग लग गई। साथ ही चेतावनी दी गई है कि युद्ध की स्थिति में होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही पर ईरान नियंत्रण कर सकता है।
उधर इस युद्ध को लेकर अमेरिका के भीतर भी राजनीतिक बहस तेज हो गई है, जहां संसद में ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को लेकर मतभेद सामने आ रहे हैं।