नई दिल्ली | पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति पर बढ़ते दबाव के बीच अमेरिका ने भारत को राहत देते हुए रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट देने का फैसला किया है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय की ओर से यह जानकारी दी गई कि यह छूट भारतीय रिफाइनरियों को पहले से समुद्र में फंसे तेल सौदों को पूरा करने के लिए दी गई है, ताकि वैश्विक बाजार में तेल आपूर्ति प्रभावित न हो।
अमेरिकी ट्रेज़री सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर बताया कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध की स्थिति के कारण तेल आपूर्ति में बाधा उत्पन्न हो रही है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए यह अस्थायी कदम उठाया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह छूट सीमित समय के लिए है और इससे रूस को कोई बड़ा आर्थिक लाभ नहीं मिलने वाला।
अमेरिकी प्रशासन के अनुसार यह अनुमति केवल उन तेल सौदों तक सीमित रहेगी जो पहले से ही समुद्री मार्ग में हैं। इसका उद्देश्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहे दबाव को कम करना और बाजार में अचानक कमी की स्थिति से बचाव करना है। साथ ही अमेरिका ने उम्मीद जताई है कि भविष्य में भारत अमेरिकी कच्चे तेल की खरीद बढ़ा सकता है, क्योंकि दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है।
हालिया आंकड़ों के अनुसार भारत ने पिछले कुछ महीनों में रूसी तेल आयात में कमी दर्ज की है। जनवरी 2026 में भारत ने खाड़ी देशों और अमेरिका से अधिक तेल खरीदा, जिसके चलते कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी घटकर 20 प्रतिशत से भी कम रह गई है।
ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज़ जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति प्रभावित होती है, तो भारत के पास मौजूद लगभग 100 मिलियन बैरल कच्चे तेल का भंडार देश की जरूरतों को करीब 40 से 45 दिनों तक पूरा करने में सक्षम है।