कुल्लू में स्मार्ट मीटर के खिलाफ महिलाओं का प्रदर्शन, सरकार से फैसला वापस लेने की मांग
मनमिन्दर अरोड़ा, कुल्लू -:हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिला मुख्यालय ढालपुर में स्मार्ट मीटर लगाने के विरोध में सैकड़ों महिलाएं सड़कों पर उतर आईं। महिलाओं ने प्रदर्शनी मैदान से लेकर उपायुक्त कार्यालय तक रोष रैली निकाली और डीसी कार्यालय के बाहर जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से स्मार्ट मीटर लगाने के फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने आरोप लगाया कि हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड द्वारा चलाया जा रहा स्मार्ट मीटरिंग अभियान नियमों को दरकिनार कर जबरन लागू किया जा रहा है। उनका कहना था कि बोर्ड के अधिकारी जिन फायदों का दावा कर रहे हैं, वे जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाते।
इस मौके पर विद्युत बोर्ड पेंशनर्स फोरम के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष कुलदीप सिंह खरवाड़ा ने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि प्रस्तावित बिजली कानून 2025 के प्रावधानों के तहत विद्युत वितरण क्षेत्र में निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटरिंग का असली उद्देश्य उपभोक्ताओं की सुविधा नहीं बल्कि निजी कॉरपोरेट कंपनियों को लाभ पहुंचाना है।उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की आरडीएसएस योजना के तहत प्रदेश के लिए करीब 1800 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, जबकि लगभग 26 लाख उपभोक्ताओं के लिए स्मार्ट मीटर लगाने के टेंडर करीब 2500 करोड़ रुपये के जारी किए गए हैं। उनका कहना था कि प्रदेश में करीब 13 लाख उपभोक्ताओं की बिजली खपत 125 यूनिट से कम होने के कारण उनका बिजली बिल शून्य आता है। ऐसे में 9 से 10 हजार रुपये कीमत के स्मार्ट मीटर लगाना उपभोक्ताओं पर अनावश्यक आर्थिक बोझ होगा।
खरवाड़ा ने यह भी कहा कि स्मार्ट मीटर लगाने से करीब 1500 आउटसोर्स कर्मचारियों का रोजगार प्रभावित हो सकता है और बिजली बोर्ड के कई नियमित कर्मचारी भी सरप्लस हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पहले से लगे इलेक्ट्रॉनिक और ट्राई-वेक्टर मीटर डिजिटल तकनीक पर आधारित हैं और वर्तमान जरूरतों को पूरा कर रहे हैं। ऐसे में उन्हें बदलना जनता के पैसे की बर्बादी है।उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के माध्यम से धीरे-धीरे बिजली बोर्ड के कई कार्य निजी कंपनियों को सौंपे जा रहे हैं, जिससे भविष्य में उप-मंडलों और अनुभागों के बंद होने की स्थिति पैदा हो सकती है और कर्मचारियों का भविष्य भी संकट में पड़ सकता है।