धर्मशाला, राहुल -:धर्मशाला स्थित केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) के क्षेत्र में काम शुरू कर दिया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एआई से जुड़े सर्टिफिकेट और डिग्री कोर्स शुरू करने की दिशा में योजना बना रहा है। संभावना जताई जा रही है कि आने वाले समय में छह माह और एक वर्ष की अवधि वाले एआई आधारित कोर्स विश्वविद्यालय में शुरू किए जा सकते हैं।
केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एसपी बंसल ने बताया कि विश्वविद्यालय ने पहले इंडियन नॉलेज सिस्टम पर विशेष रूप से काम किया है। प्रधानमंत्री के “विकास भी और विरासत भी” के विचार को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय ने पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक शिक्षा को साथ लेकर आगे बढ़ने का प्रयास किया है। इसी क्रम में अब तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में भी विश्वविद्यालय नई पहल कर रहा है।उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के कंप्यूटर साइंस विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से जुड़ा ऐसा करिकुलम तैयार किया जाए, जिसे भविष्य में विभिन्न विषयों के साथ जोड़ा जा सके। इसके तहत 12 क्रेडिट का एक विशेष करिकुलम तैयार किया जा रहा है। यह करिकुलम आगे चलकर छह माह और एक वर्ष के सर्टिफिकेट और डिग्री कोर्स शुरू करने में सहायक होगा।
प्रो. बंसल के अनुसार, एआई का भविष्य काफी व्यापक है और इसका सही उपयोग शिक्षा और शोध के क्षेत्र में नए अवसर पैदा कर सकता है। उन्होंने कहा कि तकनीक का दुरुपयोग नहीं बल्कि सही दिशा में उपयोग होना चाहिए, जिससे शिक्षण संस्थानों और विद्यार्थियों को इसका अधिकतम लाभ मिल सके।
उन्होंने यह भी बताया कि इंडियन इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (आईआईआरएफ) की रैंकिंग में विश्वविद्यालय पहले आठवें स्थान पर रह चुका है। उस समय विश्वविद्यालय ने अलग से डाटा जमा नहीं कराया था, बल्कि गूगल से उपलब्ध जानकारी के आधार पर रैंकिंग तैयार की गई थी। वहीं नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) के लिए विश्वविद्यालय ने आवेदन किया है और बेहतर रैंक की उम्मीद जताई जा रही है।