मंडी, धर्मवीर -: अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर आज आपको एक ऐसी ’’राजकुमारी’’ की प्रेरक कहानी बताने जा रहे हैं जिसका बुजुर्गों के प्रति इतना लगाव है कि उसने बेसहारा बुजुर्गों की सेवा के लिए वृद्धाश्रम ही खोल दिया है। नौकरी को छोड़कर अब यह महिला दिन-रात बुजुर्गों की सेवा में जुटी रहती है। कौन है यह महिला जो बन बैठी है ’’बुजुर्गों की राजकुमारी’’ और क्यों है इसे बुजुर्गों से इतना लगाव, जानिए हमारी इस खास रिपोर्ट में।
मंडी शहर के साथ लगते कैहनवाल गांव की 46 वर्षीय प्रिंसी गुलेरिया को अगर बुजुर्गों की राजकुमारी कहा जाए तो यह गलत नहीं होगा। प्रिंसी को बुजुर्गों के प्रति इतना लगाव है कि उसने बेसहारा बुजुर्गों की सेवा के लिए आश्रम ही खोल दिया है। निजी क्षेत्र में लंबे समय तक नर्स के रूप में सेवाएं देने के बाद अब प्रिंसी गुलेरिया वर्ष 2022 से मंडी जिला के गुटकर में जीवन सहारा वृद्धाश्रम का संचालन कर रही है। यह वृद्धाश्रम आरोग्य जन कल्याण समिति के माध्यम से चलाया जा रहा है। प्रिंसी ने बताया कि बचपन से ही उसका लगाव बुजुर्गों के प्रति रहा। दादी-नानी के साथ एक अलग तरह की अटैचमेंट रही। जब बड़ी हुई तो हमेशा सड़क किनारे पड़े बुजुर्गों को देखकर मन में कई तरह के सवाल उठने लगे। फिर इन बुजुर्गों से बातचीत करना शुरू किया और उनके दुख दर्द को जानने के बाद इनकी सेवा के लिए वृद्धाश्रम ही खोल दिया। प्रिंसी के पास मौजूदा समय में 10 बुजुर्ग अपना जीवन यापन कर रहे हैं और इनमें से अधिकतर को वे सड़क किनारे, शमशानघाट या फिर किसी झोंपड़ी से दयनीय हालत में रेस्क्यू करके ही लाई हैं। प्रिंसी का मानना है कि वह ऐसा कार्य करना चाहती हैं जिससे दूसरों के चेहरों पर भी मुस्कान आए और खुद को भी संतुष्टि मिले। इसलिए ही वह आश्रम का संचालन कर रही हैं।
प्रिंसी ने बताया कि जब उन्होंने आश्रम को शुरू किया तो कुछ लोगों ने इसे एक सामाजिक बुराई बताते हुए तरह-तरह के सवाल भी उठाए। क्योंकि प्रिंसी उन बुजुर्गों को भी अपने पास आश्रय देती हैं जो परिवार होने के बाद भी किन्हीं परिस्थितियों के कारण अपने परिवार के साथ नहीं रहना चाहते। लेकिन बहुत से ऐसे बुजुर्ग भी हैं जिन्हें प्रिंसी ने वापिस उनके परिवारों तक पहुंचाया है। प्रिंसी ने बताया कि उनका आश्रम पूरी तरह से जनसहयोग से ही चल रहा है। बहुत से लोग और संस्थाएं यहां आकर बुजुर्गों के लिए स्वेच्छा से सहयोग करते हैं। लेकिन सरकार से कोई मदद नहीं मिलती। प्रिंसी का मानना है कि अगर सरकार उन्हें मदद करे तो वह इसका संचालन और बेहतर ढंग से कर सकती हैं। इन्होंने सरकार से आश्रम के लिए जमीन उपलब्ध करवाने की मांग उठाई है ताकि आश्रम का अपना भवन बनाया जा सके। क्योंकि मौजूदा समय में यह किराए के भवन में चल रहा है।
निश्चित रूप से प्रिंसी ने आज अपने नाम के मुताबिक काम करके जो मिसाल पेश की है वो तारीफ-ए-काबिल है। ऐसे बिरले ही लोग हैं जो सड़क किनारे पड़े लोगों का दुख दर्द समझ कर उनकी सेवा के बारे में सोचते होंगे, लेकिन प्रिंसी ऐसे सभी बेहसहारा बुजुर्गों की राजकुमारी बनकर सामने आई है।